प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करते लाहौल-स्पीति के नवांग उपासक।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कोरोना वैक्सीन पर संवाद के लिए लाहौल-स्पीति के नवांग उपासक को 150 किमी दूर कुल्लू आना पड़ा। उपायुक्त लाहौल-स्पीति को संवादकर्ता नवांग उपासक को करीब 150 किमी दूर कुल्लू ले जाना पड़ा। कुल्लू में एनआईसी सेंटर में लाहौल-स्पीति के नवांग उपासक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संवाद किया। घाटी की ढुलमुल बिजली और इंटरनेट व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन किसी तरह का जोखिम उठाने को तैयार नहीं था।
प्रशासन को हर हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वैक्सीन संवाद में लिंक होना था। लिहाजा हालात को देखते हुए केलांग के बजाय वैक्सीन संवाद के लिए कुल्लू से ऑनलाइन किया गया। घाटी में कई बार बिना सूचना के बिजली गुल हो जाती है। बीएसएनएल की इंटरनेट सेवा से जनता का भरोसा उठ चुका है। लाहौल-स्पाीति का हर कार्यालय बीएसएनएल की टेलीफोन और इंटरनेट सेवा से जोड़ा गया है, लेकिन सेवा सुचारु नहीं होने से सरकारी कामकाज का लटकना आम बात है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुए संवाद में हिमाचल के शिमला, हमीरपुर, मंडी, कुल्लू और लाहौल-स्पीति से बेहतर कार्य करने वाले लोग जुड़े थे। लाहौल-स्पीति को छोड़कर सभी लोग अपने-अपने जिलों से ही इस संवाद के लिए ऑनलाइन जुड़े। लेकिन नवांग उपासक को इस संवाद में जुड़ने के लिए लाहौल से कुल्लू आना पड़ा।
वहीं जिला कोविड अधिकारी डॉ. रंजीव वैद ने कहा कि लामा नवांग उपासक 45 से अधिक आयु वालों में वैक्सीन लगवाने वाले पहले शख्स थे। उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं की मदद से लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित किया। वहीं नवांग उपासक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संवाद करके वह गर्व महसूस कर रहे हैं। वैक्सीनेशन में मेडिकल टीम के साथ बौद्ध भिक्षुओं का भी बड़ा योगदान रहा है।