प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी वादों से हिमाचल वासियों को खासी उम्मीद है। पीएम बनने से पहले लोकसभा चुनाव के दौरान हिमाचल आए नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वे हिमाचल के लिए ज्यादा करेंगे।
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मोदी ने रेलवे, पर्यटन, रोजगार बढ़ाने पर काम करने के अलावा किसानों-बागवानों के हितों की बात कर उनकी भी नब्जें पकड़ी थीं। उन्होंने वर्ष 2014 में प्रदेश में चार रैलियां की थीं। मोदी ने तब कहा था कि हिमाचल का उनके जीवन में खास महत्व है।
यहां से भारमुक्त होकर ही वे गुजरात गए थे। अगर उन्हें सेवा का मौका मिला तो हिमाचल के लिए औरों से अधिक करेंगे। वे हिमाचल के लोगों के प्रति प्यार को विकास के रूप में लौटाएंगे। मोदी ने हिमाचल के लोगों को औरों से दो सपने ज्यादा देखने के लिए कहा था।
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चुनाव के समय मोदी ने किए थे ये वायदे
वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी की पहली रैली सुजानपुर में हुई थी। ये 16 फरवरी 2014 को हुई थी। इसमें नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उन्हें देश की सेवा का मौका मिला तो हिमालयी राज्यों के लिए अलग नीति बनाई जाएगी।
ये नीति हिमाचल, उत्तराखंड से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों के लिए होगी। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में मुख्यमंत्रियों को केवल दस मिनट सुन लेने से कुछ नहीं होगा। मोदी ने कहा था कि पहाड़ों में रेल नेटवर्क बढ़ाने से विकास होता है, लेकिन इस दिशा में अब तक कुछ नहीं हुआ है।
मोदी ने कहा था कि वाजपेयी सरकार ने हिमाचल सरकार को विशेष औद्योगिक पैकेज दिया था, मगर इसे कांग्रेस की केंद्र सरकार ने वापस ले लिया। सेब पर वाजपेयी सरकार ने आयात शुल्क बढ़ाया था, मगर कांग्रेस ने इसे बढ़ाने का वादा किया था। इसे पूरा नहीं किया गया।
बागवानों को है बड़ी उम्मीदें, मोदी ने भी किया था वायदा
इसके बाद 29 अप्रैल 2014 को नरेंद्र मोदी फिर से हिमाचल आए और उन्होंने पालमपुर, मंडी एवं सोलन में रैलियां कीं। मोदी ने इस दौरान कहा कि अगर उन्हें सत्ता में आने का मौका मिला तो वे सेना के जवानों के लिए ‘वन रैंक, वन पेंशन’ का लाभ देंगे। मोदी ने कहा था कि सेना में जगह खाली है, मगर केंद्र सरकार हिमाचल के नौजवानों को भर्ती करने के लिए तैयार नहीं है।
उन्होंने लाहौल के आलू और गुच्छी पर कुछ करने की उम्मीद भी जताई। मोदी ने देवभूमि में प्राकृतिक संसाधनों का उल्लेख करते हुए लाहौल का आलू और जंगलों में उगने वाली औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी का खास जिक्र किया था। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस सरकार पर इस दिशा में कुछ नहीं करने का आरोप लगाया। हिमाचल के लिए पर्यटन की संभावनाओं पर काम करने को कहा।
उन्होंने यहां भी दोहराया कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व की एनडीए सरकार ने सेब बागवानों के लिए सेब आयात पर 50 फीसदी आयात शुल्क लगाया था, लेकिन इसके बाद इसे बढ़ाया ही नहीं गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली में बैठी सरकार ने अपनी कमाई के चक्कर में सेब के बाजार को खुला छोड़ दिया है। जो भी देश चाहे, यहां पर सेब बेच सकता है।
- हिमाचल, उत्तराखंड के लिए अलग नीति
- नए रेल नेटवर्क विस्तार और निर्माणाधीन योजनाओं को पर्याप्त बजट
- उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष पैकेज
- सेना में हिमाचली नौजवानों की भर्ती
- आलू, गुच्छी और जड़ी-बूटियों को पेटेंट करवाना और अच्छे रेट दिलवाना
- पर्यटन नेटवर्क को अधिक सुदृढ़ करना
- सेब को डब्ल्यूटीओ में विशेष श्रेणी उत्पाद घोषित करवाना, विदेशी सेब आयात पर सख्ती
- अर्ध सैनिक बलों के लंबित मसलों पर बड़ा एलान