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Himachal: नई ग्रीन औद्योगिक नीति में टैक्स में रियायत देने की तैयारी, उद्योगों को मिलेगा प्रतिस्पर्धी माहौल

Fri, 12 Jun 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

प्रदेश सरकार नई ग्रीन औद्योगिक नीति के तहत उद्योगों को विभिन्न करों और शुल्कों में राहत देने की तैयारी कर रही है। 
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उद्योग(सांकेतिक)। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश सरकार नई ग्रीन औद्योगिक नीति के तहत उद्योगों को विभिन्न करों और शुल्कों में राहत देने की तैयारी कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश में स्थापित उद्योगों को प्रतिस्पर्धी माहौल उपलब्ध कराना है, जिससे कंपनियां दूसरे राज्यों के बजाय हिमाचल में ही निवेश कर सकें। उद्योग विभाग की ओर से तैयार की गई यह नीति निवेश बनाए रखने और नए निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास करेगी। पर्वतीय राज्य होने के कारण हिमाचल में उद्योगों को परिवहन और उत्पादन लागत अधिक वहन करनी पड़ती है। ऐसे में सरकार लागत कम करने के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार कर रही है। नई नीति में कई महत्वपूर्ण कर और शुल्क रियायतें शामिल हैं। इनमें उद्योगों को राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) में छूट प्रमुख है। विद्युत शुल्क में राहत और कच्चे माल पर लगने वाले प्रवेश कर में कमी का भी प्रस्ताव है। परिवहन शुल्क को कम करने जैसे प्रावधान भी शामिल किए जा सकते हैं। ये सभी कदम उद्योगों की परिचालन लागत घटाने में सहायक होंगे। सरकार का विश्वास है कि उद्योगपतियों को रियायतों से हिमाचल निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकेगा।

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पर्यावरण अनुकूल उद्योगों पर जोर

ग्रीन औद्योगिक नीति पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देती है। हरित तकनीकों को अपनाने वाले उद्योगों को अतिरिक्त लाभ दिए जाएंगे। सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेंगे। प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन करने वाली इकाइयों को विशेष सुविधाएं देने का भी प्रस्ताव है। सरकार का लक्ष्य औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है। यह पहल प्रदेश को एक टिकाऊ औद्योगिक गंतव्य बनाने में मदद करेगी।
 
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नीति का उद्देश्य और समयसीमा

इस नीति का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धी माहौल बनाना है। उद्योग विभाग अंतिम मसौदे को तैयार कर विभिन्न विभागों से राय ले रहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद नीति अगस्त में लागू की जा सकती है। प्रदेश की मौजूदा औद्योगिक नीति 31 मार्च को समाप्त हो चुकी थी, जिसे सरकार ने अस्थायी रूप से आगे बढ़ाया था।
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