ये तस्वीरें ब्रिटेन से डाक से उन्हें भेजी जा चुकी हैं और जल्द ही उन्हें मिल जाएंगी। वर्मा ने बताया कि सोलन के इतिहास को लोगों तक पहुंचाने के लिए वे अपने बेकरी उत्पादों का सहारा लेंगे।
उनके यहां बनने वाले सभी तरह के उत्पादों के माध्यम से यह जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। इस मौके पर एसके वर्मा के पिता ओम प्रकाश वर्मा व उनके बेटे मधुकर वर्मा भी मौजूद रहे। बड़ोग में सुरंग का निर्माण कर्नल बड़ोग ने शुरू किया था।
19वीं सदी के शुरूआत में पूरी हुई कालका-शिमला रेललाइन की सबसे लंबी सुरंग है। एसके वर्मा के पिता ओमप्रकाश वर्मा ने बताया कि पुराने जमाने में चंडीगढ़ से शिमला पहुंचने में पूरा एक दिन लग जाता था।
ब्रिटिशकाल में जो गाड़ियां थीं, वो पहाड़ी सफर में कामयाब नहीं थी और पांच किलोमीटर चलने के बाद गर्म हो जाती थी। उन्हें ठंडा करने के लिए काफी देर तक रोकना पड़ता था। उस जमाने में खिंची गई तस्वीरें अद्भुत हैं। यह सोलन के इतिहास को जानने में ये मील का पत्थर साबित होंगी।