उच्च शिक्षा निदेशक जब ज्वालाजी कॉलेज में प्रिंसिपल थे तो उन्होंने 33 कर्मचारियों को पीटीए के तहत भर्ती किया। पीटीए फंड के 25 लाख रुपये इन कर्मियों को वेतन के रूप में दिया जबकि कॉलेज में 35 लोगों का स्टाफ पहले से था। साल 2011-12 में ज्वालाजी कॉलेज में पीरियड आधार पर इतिहास के सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार हुए। इसमें संजय कुमार छठे नंबर पर थे।
बावजूद इसके इन्हें तैनाती दी गई। कॉलेज के अधिग्रहण का फैसला 2013 में हुआ। उस समय इनकी नियुक्ति को अपात्र पाया गया। इसके बावजूद इन्हें दोबारा से पीरियड आधार पर रखा। 2014 मेें अपने ही स्तर पर अनुबंध पर रख लिया।
निदेशक बनने के बाद चहेते सहायक प्रोफेसर को नियमित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया गया। कैबिनेट को गुमराह कर नियमित करवाने के आदेश जारी कर दिए। डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा निदेशक बनने के लिए पात्रता भी पूरी नहीं करते हैं। बावजूद इसके इन्हें निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है।