एमसी में तीन दावेदार, सभी जमा दो पास
प्रशासनिक अधिकारी पद भरने को मिल चुकी है मंजूरी
अब आड़े आ रही है स्नातक पास होने की शर्त
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम का पहला प्रशासनिक अधिकारी बनाने के लिए निगम प्रशासन को स्नातक पास अधीक्षक नहीं मिल रहे। नगर निगम में तीन अधीक्षक ग्रेड वन इस पद के दावेदार हैं लेकिन सभी जमा दो पास हैं। 20 से 25 सालों का अनुभव होने के बावजूद यह अब प्रशासनिक अधिकारी नहीं बन पाएंगे।
नगर निगम ने पहली बार प्रशासनिक अधिकारी का पद सृजित किया है। सरकार ने भी इसे मंजूरी दी है। निगम में आयुक्त, संयुक्त आयुक्त पदों पर एचएएस अधिकारी तैनात होते हैं जो हर दो तीन साल बाद बदल जाते हैं। प्रशासनिक अधिकारी का पद नगर निगम के ही वरिष्ठ कर्मचारी यानि अधीक्षक ग्रेड वन से भरा जाना है। यह पद इसलिए सृजित किया था ताकि एचएएस अफसरों के बदलने के बावजूद निगम में एक ऐसा अफसर तैनात रहे जिसे सालों से यहां काम करने का अनुभव हो।
सरकार ने इस पद को मंजूरी देने के साथ ही नगर निगम को इस पद पर तैनाती के लिए नियम बनाने के निर्देश दिए थे। निगम ने इसका प्रस्ताव बनाया जिसमें इस पद के लिए न्यूनतम दो साल ग्रेड वन अधीक्षक के पद का अनुभव होना अनिवार्य रखा था। लेकिन बीते महीने हुई नगर निगम की मासिक बैठक में सदन ने इसमें स्नातक पास होने की शर्त भी जोड़ दी। अब जब सदन के फैसले के अनुसार नगर निगम इस पद को भरने लगा तो पता चला कि जो तीन वरिष्ठ अधीक्षक ग्रेड वन हैं, वह स्नातक की शर्त पूरी नहीं कर पा रहे। ऐसे में यह पद भरना मुश्किल हो गया है।
कर्मचारी नाराज, सदन में जा सकता है प्रस्ताव
नगर निगम के कर्मचारी इस शर्त से नाराज हैं। इनका कहना है कि पहले तय किए प्रस्ताव के अनुसार ही इस पद को भरा जाना चाहिए। सदन शर्त नहीं लगा सकता। कहा कि जिनके पास अनुभव है, उसे इस पद पर तैनात किया जाना चाहिए। निगम में जितने भी पुराने कर्मचारी और अधिकारी हैं, वह ज्यादातर 12वीं पास हैं। लेकिन काम का पूरा अनुभव है। कर्मचारियों का एक गुट इस मामले को दोबारा सदन में भेजने के पक्ष में है। इनका कहना है कि कुछेक कर्मचारियों ने पार्षदों को गुमराह कर यह शर्त लगवा दी।
ग्रेजुएशन की शर्त है जरूरी : आयुक्त
नगर निगम आयुक्त आशीष कोहली ने कहा कि नगर निगम में प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए सदन ने ग्रेजुएशन की शर्त लगाई है। इसे लागू किया जा रहा है। यदि कोई अधीक्षक ग्रेड वन इस शर्त को पूरा नहीं करता है तो उसे इस पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता।