हिमाचल प्रदेश सरकार ने भले ही 47 स्टोन क्रशरों को संचालन की अनुमति दे दी है, लेकिन अभी यह क्रशर जांच से बाहर नहीं हुए हैं। सरकार ने दो आईएसएस अधिकारियों की अगुवाई में हाईपावर कमेटी गठित की है, जो बंद पड़े और संचालित हो रहे सभी क्रशरों की जांच करेगी। गड़बड़ी मिली तो जुर्माना लगेगा। सरकार ने इस कमेटी को क्रशर संचालकों की मनमानी रोकने के लिए कड़े नियम बनाने का भी काम सौंपा है। मौजूदा समय में अवैध खनन पर अंकुश लगाने और कार्रवाई के लिए कोई पुख्ता नियंत्रण नहीं है। सरकार ने जिला प्रशासन, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खनन, पर्यावरण सहित अन्य महकमों को अधिकृत कर रखा है।
खनन करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए अब सरकार नए सिरे से व्यवस्था बनाने जा रही है, जिसका जिम्मा हाईपावर कमेटी को सौंपा गया है। सरकार की ओर से गठित मल्टी सेक्टर एक्सपर्ट कमेटी ने प्रदेश में बिना वैध दस्तावेजों के चल रहे थे 68 क्रशरों का खुलासा किया था। बिना पर्यावरणीय मंजूरी के इन क्रशरों का संचालन किया जा रहा था। भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए हाईपावर कमेटी कड़े नियम तय करेगी। हाईपावर कमेटी की अंतिम रिपोर्ट जब तक नहीं आती, तब तक प्रदेश में नए क्रशरों के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।