सहायक नदियों के कारण बढ़ता है यमुना में पानी
जल शक्ति विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हालांकि अभी तक यमुना नदी पर किसी तरह की कोई पेयजल व सिंचाई योजना नहीं है। लेकिन यमुना की सहायक नदियां गिरि, बाता व टौंस आदि पर स्थित पेयजल योजनाएं हजारों की आबादी के हलक तर कर रही हैं, तो वहीं सिंचाई योजनाएं किसानों के लिए वरदान बनी हैं। उत्तराखंड क्षेत्र से यमुना नदी पांवटा साहिब के खादर माजरी में प्रवेश करती हैं। यहां पहुंचने के दौरान यमुना में पानी की मात्रा कम ही होती है। सहायक नदियों टौंस, गिरि व बाता के मिलने के बाद जल स्तर बढ़ता है।
आबादी के लिहाज से बहुत कम हैं योजनाएं
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार यमुना नदी की सहायक नदियों गिरि, बाता व टौंस पर सीधे तौर पर व इनकी सहायक खड्डों पर करीब 361 पेयजल योजनाएं स्थापित की गई हैं। यह योजनाएं शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों की आबादी की प्यास बुझाती हैं। नौहराधार मंडल में गिरि नदी पर 27 पेयजल योजनाएं, नाहन मंडल में 14, टौंस नदी व सहायक खड़ों पर शिलाई मंडल में 257 पेयजल योजनाएं, पांवटा साहिब मंडल में 25 तथा राजगढ़ मंडल मे गिरि नदी व सहायक खड्डों पर 38 पेयजल योजनाएं चल रही हैं।
इसके अलावा उक्त सहायक नदियों पर कुल 147 सिंचाई योजनाएं चलाई जा रही हैं। हालांकि आबादी व जमीन को देखते हुए यह योजनाएं यहां न के बराबर हैं। अधिकतर कृषि बारिश पर निर्भर रहती हैं। यमुना की सहायक नदियों पर 59 पेयजल व 26 सिंचाई योजनाओं का कार्य प्रगति पर जानकारी के अनुसार यमुना की सहायक नदियों व खड्डों पर अभी 59 पेयजल व 26 सिंचाई योजनाओं का कार्य प्रगति पर है। इन पेयजल योजनाओं से यहां 2,76,360 की आबादी लाभान्वित होगी। बता दें कि इन क्षेत्रों में अभी ओर भी योजनाओं की दरकार है और सरकारें हर साल यहां सुविधा को देखते हुए योजनाएं बढ़ा रही है।