पहाड़ों की खूबसूरती जितनी खास है, उतना ही अनोखा यहां का खान-पान भी है। हिमाचली रसोई में कई ऐसे पारंपरिक व्यंजन हैं, जिनका स्वाद पीढ़ियों से लोगों की जुबान पर कायम है। इन्हीं में से एक है पतरोड़ू। जिसे कुछ जिलों में बोली के आधार पर पतेड़ या अन्य नाम भी दिए गए हैं। अरबी के पत्तों से तैयार होने वाला यह पारंपरिक पकवान खासतौर पर बरसात के मौसम में पहाड़ी घरों की रसोई में अपनी खुशबू बिखेरता है।
पतरोड़ू बनाने के लिए अरबी के बड़े और मुलायम पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। इन पत्तों पर बेसन या स्थानीय मसालों से तैयार मिश्रण लगाया जाता है। इसके बाद पत्तों को एक के ऊपर एक रखकर रोल किया जाता है और भाप में पकाया जाता है। पकने के बाद इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर दोबारा तला या हल्का भुना जाता है। यही प्रक्रिया पतरोड़ू को उसका खास स्वाद और बनावट देती है।
पहाड़ी क्षेत्रों में पतरोड़ू केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि परंपरा का हिस्सा माना जाता है। घर में जब इसे तैयार किया जाता है तो इसकी खुशबू से रसोई ही नहीं, बल्कि बचपन की यादें भी ताजा हो जाती हैं। बुजुर्ग महिलाएं आज भी इसे पुराने तरीके से बनाना पसंद करती हैं और नई पीढ़ी को इसकी विधि सिखाती हैं।
बदलते दौर में जहां फास्ट फूड और बाजार में मिलने वाले नए व्यंजनों का चलन बढ़ा है, वहीं पतरोड़ू जैसे पारंपरिक पकवान हिमाचल की खान-पान की पहचान को जीवित रखे हुए हैं। कई जगहों पर स्थानीय मेले, उत्सव और पारंपरिक आयोजनों में भी ऐसे व्यंजनों को खास जगह दी जाती है।