राजधानी का एक और निजी स्कूल जांच के दायरे में आ गया है। इस बार सेंट एडवर्ड स्कूल की दाखिला प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। स्कूल ने दसवीं का परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले ही प्रोविजनल एडमिशन का दायरा तय कर दिया है।
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प्री-बोर्ड परीक्षा को आधार बनाया गया है। स्कूल का यह फैसला दर्जनों छात्रों पर भारी पड़ता दिख रहा है। एक अभिभावक ने इसकी शिकायत उप निदेशक कार्यालय में कर दी है।
आरोप हैं कि जिन छात्रों के अंक प्री- बोर्ड में 70 फीसदी या इससे अधिक रहे हैं, उन्हें ही स्कूल में प्रोविजन एडमिशन दी जा रही है, अन्य बच्चों के अभिभावकों को दूसरे स्कूल में प्रवेश लेने को कह दिया गया है।
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शिकायत लेकर पहुंचे अभिभावक
हालांकि स्कूल ने किसी को अभी तक ट्रांसफर सर्टिफिकेट नहीं थमाए हैं। ऐसे ही एक छात्र के अभिभावक ने बुधवार को उप निदेशक कार्यालय में आ कर स्कूल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है, और इसमें पूरे मामले की छानबीन करने की मांग उठाई है।
अभिभावक ने इसे बच्चे के भविष्य से जुड़ा मामला करार देकर स्कूल के अपने स्तर पर बनाए नियमों के आधार पर की जा रही मनमानी को रोकने की गुहार लगाई है। अभिभावक ने शिकायत में कहा है कि दस साल से उसका बच्चा इसी स्कूल में पढ़ रहा है।
हर सत्र में हजारों की फीस जमा करवाई, बावजूद इसके अब स्कूल ग्यारहवीं कक्षा में अंकों की शर्त को लगाकर उसे साइंस संकाय में प्रवेश देने से इंकार कर रहा है। परिणाम आने से पहले ही प्रोविजनल एडमिशन तक नहीं दी जा रही है। ऐसे में वह अपने बच्चे को कहां प्रवेश दिलवाएं।
40 छात्रों पर सख्त हुआ स्कूल
अभिभावक का आरोप है कि यह अकेला उसके बच्चे का मामला नहीं है। ऐसे करीब 40 अभिभावकों को परिणाम आने से पूर्व अपने बच्चे को कहीं और प्रवेश दिलवाने की व्यवस्था करने को स्कूल ने कह दिया है।
उधर, उप निदेशक कार्यालय के शिकायत दर्ज करने को लगाए कर्मी ने माना कि सेंट एडवर्ड स्कूल के खिलाफ शिकायत आई है। जिसे स्वीकार कर लिया गया है। वहां से अभिभावक को इस पर 19 जनवरी को उप निदेशक के लौटने पर ही आगामी कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिया गया है।
सालों से लागू नियम : फादर अनिल
सेंट एडवर्ड स्कूल के प्रधानाचार्य फादर अनिल का कहना है कि किसी को स्कूल से नहीं निकाला है। सीबीएसई के नियमों में ही स्कूल ने 70 फीसदी अंक वाले छात्रों को ही प्रवेश देने के नियम सालों से लागू किए हैं, इसे स्कूल डायरी में साफ तौर पर लिखा भी गया है।
फिलहाल प्री- बोर्ड की परीक्षा के परिणाम के आधार पर छात्रों को साइंस और कामर्स में गणित विषय के साथ अस्थाई तौर पर प्रवेश दिया जा रहा है। परिणाम आने पर ही तय होगा कि किस किस विषय में प्रवेश मिलेगा।
उन्होंने कहा कि छात्रों के अंक और उसकी क्षमता के मुताबिक ही संकाय में प्रवेश दिया जाता रहा है, ताकि छात्र सही विषय चुन सके।
राजधानी शिमला के डीएवी स्कूल की प्रधानाचार्य ने शिक्षा निदेशक के फैसले के मुताबिक बुधवार को शिकायतकर्ता अभिभावकों की बात सुनी और बच्चों को प्रवेश देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रधानाचार्य कामना बैरी ने बताया कि करीब 12 अभिभावक बुधवार को स्कूल आए थे, उनकी बात सुनने के बाद उनकी समस्या का हल कर दिया गया है, इसके अलावा जिन छात्रों ने भी स्कूल से अभिभावक के स्थानांतरण के कारण भी स्कूल से ट्रांसफर लिया है, उनके मामलों को सुन कर प्रवेश दिया जा रहा है, प्रवेश से कोई इंकार नहीं किया जा रहा है।