कारगिल में 1999 में पाकिस्तान के साथ चले दो माह तक के युद्ध में हिमाचल प्रदेश के वीर सपूतों ने अदम्य साहस का परिचय देते ह़ुए मिसाल पेश की। कारगिल युद्ध में प्रदेश के 52 वीर सपूतों ने प्राणों की आहुतियां दीं। इन जवानों की शहादत आज भी युवाओं को कठित हालात में हौसला बनाए रखते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। नौजवानों की प्रतिमाएं देख फौज में शामिल होकर देश सेवा के लिए प्रेरित हो रहे हैं। ऑपरेशन विजय में सेना के 527 जवान बलिदान हुए। इनमें से 52 हिमाचली जवान थे। हिमाचल के 52 बलिदानियों में सबसे अधिक कांगड़ा जिला के 15 जवान शामिल थे।
पालमपुर के कैप्टन विक्रम बत्रा को मरणोपरांत, जबकि बिलासपुर के राइफलमैन संजय कुमार को सर्वोच्च गैलेंट्री अवार्ड परमवीर चक्र से नवाजा गया था। हिमाचल के सपूतों को दो अशोक चक्र, 10 महावीर चक्र, 18 कीर्ति चक्र, 51 वीर चक्र, 89 शौर्य चक्र और 985 अन्य मेडल मिले हैं। ब्रिगेडियर (सेवानिवृत) खुशाल ठाकुर के नेतृत्व में 23 जुलाई को 18 ग्रेनेडियर ने टाइगर हिल पर तिरंगा फहराया था। इस यूनिट को राष्ट्रपति ने 52 वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया था। 25 साल पहले जो जख्म कारगिल युद्ध में मिले थे वह जख्म आज तक नहीं भर सके हैं। कारगिल युद्ध में किसी ने बेटा खोया, किसी ने भाई तो किसी ने पिता। फिर में हिमाचलियों में अपने बेटों को सेना में भेजना की उत्साह कम नहीं हुआ है।