हिमाचल में पंचायत पुनर्सीमांकन पर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग सरकार के दबाव में आकर चहेतों को फायदा पहुंचाने का काम कर रहा है।
हाईकोर्ट ने चुनाव की तिथि के 120 दिन पहले पंचायत पुनर्सीमांकन को खारिज करने का फैसला सुनाया है। अब राज्य चुनाव आयुक्त की ओर से नियमों में बदलाव करना आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। भाजपा इस फैसले के खिलाफ केंद्रीय चुनाव आयोग सहित सभी उपयुक्त मंचों पर विरोध दर्ज करवाएगी। कहा कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव आयोग का सहारा लिया है।
भले ही चुनाव आयोग के पास पूर्व में जारी अधिसूचना में बदलाव करने का अधिकार हो, लेकिन अपनी निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए आयोग को पार्टी विशेष को फायदा पहुंचाने वाले इस निर्णय से बचना चाहिए था। विशेषकर उन परिस्थितियों में, जब हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की अधिसूचना के आधार पर ही पंचायतों के पुनर्सीमांकन पर रोक लगाई थी। आयोग को चाहिए था कि वह सर्वदलीय बैठक के पश्चात इस तरह के निर्णयों में संशोधन करता।
भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार, मंत्रालय और विभाग में चल रही तनातनी में पंचायत चुनावों को मजाक बनाकर रख दिया है। मंत्रालय और विभाग की लचर कार्यप्रणाली से अभी तक आरक्षण रोस्टर जारी नहीं हुए हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि पंचायतीराज मंत्री स्पष्ट करें कि जब सारा देश डिजीटल होने की तरफ बढ़ रहा है तो किन कारणों से आरक्षण रोस्टर को लेकर बने सॉफ्टवेयर को कैबिनेट ने रिजेक्ट किया?
कहा कि जिला, ब्लॉक स्तर पर आरक्षण रोस्टर पर सत्ताधारियों के हस्तक्षेप तथा गड़बड़ी की सूचनाएं लगातार पार्टी के पास आ रही हैं। आरक्षण रोस्टर जारी होने के पश्चात अगर इन तथ्यों में सत्यता पाई जाती है तो भाजपा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कानूनी कार्यवाही करेगी।
नौ अक्तूबर के बाद मान्य नहीं होगा पुनर्सीमांकन- प्रदेश में अब नौ अक्तूबर के बाद ग्राम पंचायतों और जिला परिषद वार्डों का पुनर्सीमांकन मान्य नहीं होगा। राज्य चुनाव आयोग ने एक और अधिसूचना जारी कर इस पर स्थिति और स्पष्ट कर ली है। आयोग ने नई अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से नौ अक्तूबर तक जारी तमाम अधिसूचनाएं आदर्श चुनाव आचार संहिता 2015 की धारा 12.1 से प्रभावित नहीं होंगी।
यानी नौ अक्तूबर तक किया गया पुनर्सीमांकन ही मान्य होगा। इसके बाद का नहीं। इससे पहले जारी अधिसूचना में आयोग ने पुनर्सीमांकन के लिए पंचायतों का टेन्योर पूरा होने 120 दिन की शर्त हटाई थी। इसे दो नवंबर की तिथि से जारी किया गया।
इसके बाद फिर से दो नवंबर से दिनांकित अधिसूचना को बुधवार को आयोग की वेबसाइट पर डालकर इसे पब्लिक डोमेन में लाया गया। पंचायतों के टेन्योर 22 जनवरी को पूरे हो रहे हैं। अब आयोग की नई व्यवस्था में पंचायतों की सीमाओं में इनकेे टेन्योर पूरा होने के 106 दिन के भीतर किसी भी तरह की अल्टरेशन मान्य नहीं होगी।