कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की ओर से विकसित इस गेहूं की किस्म को हाल ही में पालमपुर में कृषि विभाग और विवि के विशेषज्ञों की प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में अनुमोदित किया गया।
कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने गेहूं की एक नई किस्म विकसित की है। यह किस्म जल्द ही किसानों के खेतों तक पहुंच सकती है। इसकी खासियत है कि यह किस्म कम बारिश या बारिश पर निर्भर रहने वाले (चंगर) इलाकों के किसानों के लिए काफी कारगर साबित होगी। पोषक तत्वों से भरपूर इस किस्म को नाम दिया गया है-ट्रांबे हिम पालम गेहूं-4 (एचपीडबल्यू-484)। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अगले साल तक किसानों को यह बीज उपलब्ध हो जाएगा। विवि की ओर से विकसित इस गेहूं की किस्म को हाल ही में पालमपुर में कृषि विभाग और विवि के विशेषज्ञों की प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में अनुमोदित किया गया।
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यह किस्म प्रदेश के मध्यवर्ती व निचले क्षेत्रों के लिए अच्छी आंकी गई है, जो औसतन 30 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देेने की क्षमता रखती है। केंद्रीय मानकों के आधार पर यह किस्म रोटी और ब्रेड बनाने में काफी उपयोगी होगी। इसमें दूसरी किस्मों से अधिक खनिज की मात्रा है। यही नहीं, इस किस्म की खासियत यह होगी कि गेहूं में लगने वाली बीमारियों मसलन पीला और भूरा रतुआ से निपटने के लिए भी यह रोग प्रतिरोधक क्षमता रखती है। इससे इस फसल को इन बीमारियों का कोई खतरा नहीं होगा। विवि के कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस किस्म को प्रदेश स्तरीय कृषि कार्यशाला में अनुमोदित किया गया है। जल्द ही किसानों के खेतों तक पहुंच जाएगी।