महमूदा मामले में पाकिस्तान उच्चायोग ने इस्लामाबाद के लिए पत्र लिखकर पाकिस्तान सरकार से फाइनल रिपोर्ट मांगी है। पाकिस्तान उच्चायोग ने इस बारे में पाकिस्तान सरकार को इस्लामाबाद के लिए एक पत्र लिखा है। ममता उर्फ महमूदा के पाकिस्तानी होने के प्रारंभिक सबूत भी नहीं मिले हैं।
इसके बाद पाकिस्तान उच्चायोग चाहता है कि इस पर पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट की जाए। यह महिला शिमला के नारी सेवासदन में रह रही है और खुद को पाकिस्तान के गुजरात जिले की बता रही थी। इस महिला का यह दावा शिमला की स्वयंसेवी संस्था उमंग फाउंडेशन ने सामने लाया था।
पाकिस्तान के दिल्ली स्थित उच्चायोग कार्यालय में सोमवार को इस मामले पर विस्तार से चर्चा हुई। महमूदा पाकिस्तानी है कि नहीं? इस सवाल पर सोमवार को ‘अमर उजाला’ को पाकिस्तान उच्चायोग के विधि सलाहकार अब्दुल रहमान ने बताया कि पाकिस्तान सीआईडी की जांच के बाद वर्तमान में 99 प्रतिशत दावे के साथ यह माना जा रहा है कि वह पाकिस्तानी नहीं है।
इसके बावजूद पाकिस्तान उच्चायोग ने पाकिस्तान सरकार को सोमवार को इस्लामाबाद के लिए एक पत्र भेजा है। इसमें आग्रह किया गया है कि इस पर वहां से फाइनल रिपोर्ट भेजी जाए, जिससे कि पाकिस्तान की ओर से यह मान लिया जाए कि वह पाकिस्तानी नहीं है।
उसी के बाद भारत सरकार के स्तर पर महमूदा के असली पते की छानबीन शुरू करवाई जा सकेगी। यह मामला उमंग फाउंडेशन शिमला के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने सामने लाया था। उन्होंने पत्रकार वार्ता में कहा था कि नारी सेवा सदन मशोबरा में रह रही एक मुस्लिम महिला खुद को गुजरात जिले का निवासी बता रही हैं और गुजरात जिला पाकिस्तान में है। वह पाकिस्तानी हो सकती हैं और इसकी छानबीन होनी चाहिए।