प्रथम मिस्टर वर्ल्ड चैंपियन का खिताब जीतने वाले पद्मश्री प्रेमचंद ढींगरा शनिवार को हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में रविवार को होने जा रहे बॉडी बिल्डिंग की भारतीय टीम के ट्रायल के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने कहा पहले कुश्ती खेल में रुचि थी। 1980 में जालंधर में बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता के बाद इस तरफ ध्यान गया।
बॉडी बिल्डिंग में देश के प्रथम मिस्टर वर्ल्ड चैंपियन का खिताब जीतने वाले पद्मश्री प्रेमचंद ढींगरा ने कहा कि सफलता के लिए कोई शॉर्ट कट नहीं होता। चार दिन सप्लीमेंट खाने से नहीं, बल्कि तपकर कुंदन बनने से सफलता मिलती है। देश के लिए पदक जीतना और राष्ट्रीय ध्वज लहराना हर खिलाड़ी का सपना होता हैं।
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यह सौभाग्य उन्हें 1988 में ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड शहर में बॉडी बिल्डिंग वर्ल्ड चैंपियन बनने पर मिला था। ढींगरा शनिवार को हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में रविवार को होने जा रहे बॉडी बिल्डिंग की भारतीय टीम के ट्रायल के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने कहा पहले कुश्ती खेल में रुचि थी। 1980 में जालंधर में बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता के बाद इस तरफ ध्यान गया। फिर 1988 में वर्ल्ड चैंपियन बनकर देश को खिताब दिलाया।
हाथ में तिरंगा लेकर जीत के जश्न वाले वो पल जीवन में बेेहद भावुक कर देने वाले थे। उन्होंने बॉडी बिल्डिंग में एक बार मिस्टर यूनिवर्स, आठ बार के एशियन और नौ बार नेशनल चैंपियन समेत सैकड़ों खिताब जीते हैं। ढींगरा ने कहा कि हमारे समय में सुविधाएं कम थीं और जीत की भूख और मेहनत ज्यादा। अब शार्टकट रास्ते से कम मेहनत कर सफलता की ऊंची उड़ान भरने के कुछ युवा सपने देखते हैं।
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प्रेम चंद ढींगरा ने कहा कि जब खेल जीवन में अपने चरम पर था तब अमेरिका, जापान व ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से अपनी टीम से खेलने का ऑफर मिला था। राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीयता को सदैव सर्वोपरि रखा गया। दलीप राणा उर्फ द ग्रेट खली को भी बॉडी बिल्डिंग के टिप्स दे चुके हैं। हिमाचल से आकर पंजाब पुलिस में भर्ती होने के बाद कई बार ग्रेट खली से फिटनेस पर बात होती रही है।