मोटे अनाज की खेती को अपनाकर अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। पौष्टिक या पोषक या मोटा अनाज की खेती करने के लिए पानी की कम आवश्यकता रहती है। यह बात करसोग में नांज गांव के पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किसान नेकराम शर्मा ने कही।
किसान पारंपरिक मोटे अनाज की खेती को अपनाकर अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। पौष्टिक या पोषक या मोटा अनाज की खेती करने के लिए पानी की कम आवश्यकता रहती है। यह बात करसोग में नांज गांव के पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किसान नेकराम शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मोटे अनाज की खेती को अपना कर ही वह पद्मश्री अवार्ड हासिल कर पाए हैं। नेक राम ने मोटे अनाज की खेती की ओर लोगों का ध्यान भी आकर्षित किया है। कहा कि पारंपरिक मोटे अनाज में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक फाइबर पर्याप्त मात्रा में होने से जहां मोटा अनाज स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, वहीं इसके सेवन से कई बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
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यह अनाज शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसके सेवन से ब्लड प्रेशर में सुधार, मधुमेह, एनीमिया पर नियंत्रण, कब्ज की समस्या, दस्त रोग, मधुमेह, गुर्दे आदि की बीमारियों से बचा जा सकता है। कोदरा, कांगनी, चैलाई, सांवा, ज्वार, बिथू, भरेस आदि की खेती से अच्छी आय भी अर्जित की जा सकती है। कहा कि मोटे अनाज के बाजार में दाम भी अच्छे मिलते हैं। नेकराम शर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी किसानों को रसायनिक खेती को छोड़ प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए कदम बढ़ाने होंगे, तभी हम जहर मुक्त खेती के सपने को साकार कर सकते हैं।