धारा-118 में गैर कृषकों को हिमाचल में भूमि खरीदने की अनुमति देने मामले में हुए कथित भ्रष्टाचार संबंधी मामले में अब ट्रायल कोर्ट में बयान दर्ज होने शुरू हो गए हैं। दो दिन पहले इस मामले में राज्य सचिवालय के रिटायर्ड कर्मचारी नरेंद्र कंवर ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करा दिए हैं।
बयान दर्ज होने के साथ ही अब मामले में विजिलेंस पर जांच पूरी करने का दबाव बढ़ गया है। कथित भ्रष्टाचार के मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने साल 2010-11 में दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। दोनों ही व्यापारियों ने लगातार आरोपों को नकारा। वीरभद्र सरकार के दौरान मामले की जांच ठंडे बस्ते में चली गई।
लेकिन, जयराम सरकार के आते ही इस जांच का जिन्न फिर से बाहर निकल आया। ब्यूरो की क्लोजर रिपोर्ट को कोर्ट ने भी वापस लौटा दिया। इसी जांच के दौरान तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व और वर्तमान में राज्य चुनाव आयुक्त पार्थ सारथी मित्रा को नोटिस भेजकर जांच के दौरान कई बार पूछताछ के लिए विजिलेंस मुख्यालय बुलाया गया।
ब्यूरो ने सरकार से मित्रा के खिलाफ जांच करने की अनुमति मांगी। सरकार ने अभी तक जांच को लेकर कोई मंजूरी नहीं दी है। ऐसे में ब्यूरो की जांच पर फिलहाल ब्रेक लगी है।