प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर के बहुचर्चित आउटसोर्स भर्ती मामले की जांच शुरू हो गई है। तकनीकी शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक सुनील वर्मा की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर पहुंची है। तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा के निर्देश पर विभाग ने विश्वविद्यालय में हुई आउटसोर्स भर्तियों की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके चलते जांच टीम ने विश्वविद्यालय पहुंचकर आउटसोर्स आधार पर होने वाली इन भर्तियों को लेकर रिकॉर्ड खंगाला है और अधिकारियों से लंबी पूछताछ की है।
गौरतलब है कि तकनीकी विश्वविद्यालय परिसर दडूही, हमीरपुर में करीब 97 लाख रुपये की लागत से वेब स्टूडियो और ईआरपी सेंटर स्थापित किया गया है। वेब स्टूडियो और ईआरपी (इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) सेंटर के संचालन का कार्य किसी कंपनी को आउटसोर्स पर सौंपने के लिए पूर्व में विवि के बोर्ड ऑफ गवर्नर की बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया था। बीओजी की बैठक में स्टाफ की नियुक्तियों और संचालन राशि इत्यादि पर भी विचार-विमर्श हुआ था।
विवि ने सितंबर 2021 में ऑनलाइन माध्यम से पात्र एजेंसियों से टेंडर आमंत्रित किए थे। लेकिन जिन कंपनियों ने इसके लिए आवेदन किया, वह विवि की शर्तों पर खरा नहीं उतर पाईं। इसके चलते तकनीकी विवि शिमला की नाईलेट कंपनी (राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान) को तकनीकी स्टाफ उपलब्ध करवाने के लिए पत्र लिखा।
विवि की ओर से कंपनी को पत्र लिखने की अवधि के दौरान 25 जनवरी को पूर्ण राज्यत्व दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस सहित रविवार व अन्य अवकाश भी बीच में रहे। इसके बावजूद कंपनी ने जिस तेजी से यह प्रक्रिया पूरी कर 4 फरवरी को सात लोगों का चयन कर तकनीकी विवि को पात्र अभ्यर्थियों की सूची जारी की है, वह भी काफी चर्चा में है।
इस सूची में विवि के एक उच्च अधिकारी का बेटा भी शामिल है। क्या शिमला की नाइलेट कंपनी और तकनीकी विवि के बीच पूर्व में स्टाफ उपलब्ध करवाने को लेकर कोई एमओयू साइन हुआ है या नहीं, यह जांच का विषय है। अगर साइन हुआ है तो विवि ने किस आधार पर सितंबर माह में स्टाफ के लिए टेंडर मांगे थे।
तकनीकी शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक सुनील वर्मा ने कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौंप दी जाएगी।