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Mandi Mahashivratri: अंतिम जलेब के साथ महाशिवरात्रि महोत्सव का समापन, देव आदि ब्रह्मा ने बांधी सुरक्षा कार

Fri, 15 Mar 2024 08:11 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी

सार

सुरक्षा कार बांधकर शहर के लोगों और महाशिवरात्रि महोत्सव में आने वालों की सुरक्षा का वादा भी किया। इस दौरान पूरे मंडी शहर की परिक्रमा की। 
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अंतिम दिन देव आदि ब्रह्मा ने मंडी शहर की परिक्रमा कर बांधी सुरक्षा कार - फोटो : संवाद
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विस्तार
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छोटी काशी में देवी-देवताओं की विदाई के साथ सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव संपन्न हो गया। महोत्सव की तीसरी और अंतिम जलेब (शोभायात्रा) राज देवता माधोराय की अगुआई में शाही अंदाज में निकली। जलेब में देव माधोराय की पालकी के साथ 27 देवी-देवताओं ने शिरकत की। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल भी मुख्यातिथि शामिल हुए। इस दौरान जलेब के अलौकिक नजारों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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उनके साथ नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व सीएम जयराम ठाकुर और धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर भी मौजूद रहे। महोत्सव की अंतिम जलेब को देखने के लिए भारी जनसमूह उमड़ा। इस बार शिवरात्रि के देव समागम में 190 पंजीकृत देवी-देवता पहुंचे थे, जबकि कई गैर पंजीकृत देवी-देवताओं ने भी इस पर्व की शोभा बढ़ाई। महाशिवरात्रि महोत्सव के समापन से पहले चौहटा की जातर के बाद दोपहर ढाई बजे यह जलेब शुरू हुई। राज्यपाल ने राज देवता माधोराय और अराध्य देव बाबा भूतनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नाचते-गाते देवलुओं के साथ यह जलेब पड्डल मैदान तक पहुंची।

जलेब में शामिल हुए ये देवी-देवता
देवता छाजणू और छमांहू जलेब में सबसे आगे रहे। इसके बाद कोटलू घटोत्कच, देव कोटलू, देव विष्णु मतलोड़ा, देव मगरू महादेव, बायला नारायण, सिराज घाटी के देव बिट्ठू नारायण, लक्ष्मी नारायण, तुंगासी ब्रह्मदेव, महामाया निहरी, अंबिका नाऊ, राज देवता माधोराय की पालकी, शुकदेव थट्टा आदि देवता जलेब में साथ चले।
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इससे पहले महोत्सव के अंतिम दिन शुक्रवार को को उत्तरशाल घाटी के देव आदिब्रह्मा ने शहर की खुशहाली के लिए सुरक्षा कार बांधी। सुरक्षा कार बांधकर शहर के लोगों और महाशिवरात्रि महोत्सव में आने वालों की सुरक्षा का वादा भी किया।  इस दौरान पूरे मंडी शहर की परिक्रमा की। परंपरा के अनुसार देवलुओं ने जौ के आटे को गुलाल की तरह हवा में उड़ाकर बुरी शक्तिओं के दूर रहने का आह्वान किया। सुरक्षा कार को लेकर मान्यता है कि इससे मंडी शहर पर बुरी शक्तिओं और आपदाओं का साया नहीं पड़ता है। महाशिवरात्रि के दौरान जनपद के कई वरिष्ठ देवी-देवता रियासतकाल से ही अपनी भागीदारी निभाते आए हैं। इनमें उत्तरशाल के देव आदिब्रह्मा  की भूमिका अहम मानी जाती है।

चौहटा जातर में सैकड़ों देवी-देवताओं के दर्शन करने उमड़े लोग
 महाशिवरात्रि महोत्सव के विधिवत समापन से पहले शनिवार सुबह चौहटा में सैकड़ों देवी-देवता एक साथ विराजमान हुए। इसे चौहटा जातर कहा जाता है। यहां देवलोक सज गया है। एक साथ सैकड़ों देवी-देवताओं के दर्शन करने के लिए हजारों लोग इस जातर में उमड़े। देवताओं के पुजारियों की तरफ से श्रद्धालुओं को चावल, फूल आदि दिए गए। इस मौके पर पूरा माहौल देवमयी हो गया और छोटी काशी वाद्य यंत्रों की ध्वनियों से गूंज उठी।
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महानाटी में झूमे युवक-युवतियां
वहीं, अंतिम जलेब निकलने से पहले महानाटी का आयोजन किया गया।  महानाटी स्थानीय युवक-युवतियों व लोगों ने भाग लिया। पारंपरिक नाटी डालकर प्राचीन संस्कृति से रूबरू करवाया। हर किसी ने नाटी की प्रस्तुति को कैमरे में कैद किया। लोगों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर नाटी डाली।
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