टुटीकंडी, मेट्रोपोल और आजीविका भवन पार्किंग से लेकर उपनगरों की कई पार्किंग में खुल गईं हैं दुकानें और दफ्तर पार्किंग सुविधा घटने से टूरिस्ट सीजन में लग रहा जाम अमर उजाला ब्यूरो शिमला। शहरवासियों और सैलानियों को सुविधा देने के लिए राजधानी में बनाई कई बहुमंजिला पार्किंग में अब सरकारी दफ्तर, होटल और दुकानें खुल गए हैं। इसमें जो परिसर गाड़ियों को पार्क करने के लिए तैयार किए थे, वहां अब कारोबार किया जा रहा है। मजबूरन लोग सड़क पर गाड़ियां खड़ी करने को मजबूर हैं।
शहर की सबसे बड़ी टुटीकंडी पार्किंग की ज्यादातर मंजिलें सरकारी महकमों को दे दी हैं। इनमें कई विभागों के दफ्तर चल रहे हैं। होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी यहां चल रही हैं। एक हजार वाहनों की क्षमता वाली इस पार्किंग के ठीक बाहर एनएच पर सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। नगर निगम की योजना थी कि शिमला आने वाले सैलानी यहां गाड़ियां पार्क कर रोपवे से मालरोड तक पहुंचेंगे। रोपवे तो बना नहीं, ऐसे में निगम ने पार्किंग की ज्यादातर मंजिलें भी बंद कर सरकारी महकमों को दे दी। यही हाल कार्टरोड पर बनी नगर निगम की मेट्रोपोल पार्किंग का है। तीन मंजिला इस पार्किंग के टॉप फ्लोर पर निगम ने दुकानें खोल दी हैं। यहां 90 गाड़ियां खड़ी करने की सुविधा थी जो अब बंद है। टूरिस्ट सीजन में पार्किंग न होने के कारण कार्टरोड पर सैलानी भटकते रहते हैं।
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आजीविका भवन की पार्किंग भी बंद
शहर के लिफ्ट के पास आजीविका भवन की टैरेस पर बनी 50 वाहनों की पार्किंग भी निगम ने बंद कर दी है। यहां तहबाजारी बसाए जा रहे हैं। मेट्रोपोल पार्किंग की तरह यह भी शहर की सबसे अहम पार्किंग थी जिसके बंद होने से लोगों और कारोबारियों को परेशानी झेलनी पड़ी है। शहर में निगम की अन्य बहुमंजिला पार्किंग में भी अब कई व्यावसायिक परिसर खुल गए हैं। उपनगरों में बनी कई कवर्ड पार्किंग में भी अब वार्ड दफ्तर से लेकर अन्य परिसर खुल रहे हैं। इससे पार्किंग सुविधा लगातार घट रही है।
लागू नहीं हो रही है पालिसी शुल्क देने से बच रहे लोग
शहर में बनीं कई पार्किंग में लोग भी अब गाड़ियां खड़ी नहीं कर रहे। नगर निगम के अनुसार कई बार आवेदन मांगने पर भी लोग गाड़ियां पार्क नहीं कर रहे। शुल्क से बचने के लिए लोग सड़क पर गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं। इससे निगम को नुकसान हो रहा है। मजबूरन पार्किंग में व्यावसायिक परिसर खोले जा रहे हैं। नियमानुसार पार्किंग के कम से कम सौ मीटर के दायरे तक सड़क पर गाड़ियां पार्क नहीं हो सकती। नगर निगम ने भी इस बारे में कुछ साल पहले पार्किंग पॉलिसी बनाई थी। पार्किंग के बाहर गाड़ी खड़ी करने पर चालान का प्रावधान किया था। इससे अवैध पार्किंग पर लगाम लगनी थी लेकिन निगम आज तक इस पॉलिसी को लागू नहीं कर पाया।
पार्किंग में दुकानें खोलना गलत फैसला कार्टरोड के आसपास की पार्किंग बंद करना गलत है। इससे कारोबारी और सैलानी दोनों परेशान है। टूरिस्ट सीजन में मेट्रोपोल और आजीविका भवन पार्किंग फुल रहती हैं। अब इनके बंद होने से सभी परेशान हो रहे हैं।
जनता को सुविधाएं देने में निगम फेल नगर निगम को शहर में नई पार्किंग बनानी चाहिए लेकिन निगम इसमें फेल हो गया है। स्मार्ट सिटी के तहत बन रही पार्किंग का काम पूरा नहीं हो रहा। जो बनी है, उन्हें बंद किया जा रहा है। एसडीए में बनी पार्किंग में भी अब दफ्तर खोले जा रहे हैं। यह गलत है। -राकेश शर्मा, पूर्व डिप्टी मेयर