नूरपुर हादसे के पीड़ित परिजनों ने लोक निर्माण विभाग पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा कि जिस स्थान पर स्कूल बस गिरी थी, वहां पर लगाया गया डंगा आखिर 3 माह में ही कैसे गिर गया। इसकी जांच कर डंगा लगाने वाले ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
हादसे वाले स्थल की खराब स्थिति ठीक करने के लिए स्थानीय लोगों ने पीडब्ल्यूडी को पहले ही पत्र लिखा था। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर पहले कार्रवाई होती तो हादसा ही नहीं होता। अब सड़क को दुरुस्त करने और डंगे लगाने का क्या फायदा।
प्रबंधन को कैसे दे दी क्लीन चिट
परिजनों ने कहा कि सरकार ने स्कूल प्रबंधन को क्लीन चिट कैसे दे दी। स्थानीय पंचायत प्रधान ने चालाकी से स्कूल प्रबंधन को क्लीन चिट देकर स्कूल खुलवाया। फिर हमारे विरोध के बाद स्कूल बंद हुआ।
स्कूल प्रबंधन की बस 2013 मॉडल की नहीं थी। इसकी चेसी बदली गई है। यह बस पहले निजी रूट पर चलती थी। इसके बाद यह बस किसी को बेची गई। इसके बाद यह बस स्कूल प्रबंधन ने खरीदी। नई बस के कमानी और पट्टे चार साल में ही कैसे बदले जा सकते हैं। स्कूल बस कंडम थी।
स्कूल बस बहुत पुरानी थी और स्कूल प्रबंधन इसे नया बता रहा है। एक बार स्कूल में बस को स्टार्ट करते समय बस में आग लग गई थी, जिसका जिक्र जांच में कहीं भी नहीं है। बस के दस्तावेजों की सीबीआई से जांच करवाई जाए।
एसपी करवाएंगे एनआईटी एक्टपर्ट से जांच- एसपी संतोष पटियाल ने परिजनों से कहा कि सड़क के किनारे 3 महीने में गिरने वाले डंगे की जांच एनआईटी के इंजीनियर से करवाई जाएगी। इस संदर्भ में एसपी ने एनआईटी प्रबंधन को तुरंत पत्र लिखने के आदेश जारी किए।
एसपी ने बस की तकनीकी जांच दोबारा से फोरेंसिक एक्सपर्ट से करवाने के भी आदेश जारी किए। उन्होंने कहा कि अगर नूरपुर थाने के कर्मचारियों ने जांच में ढील बरती है तो उनके खिलाफ भी जांच की जाएगी।