अब बच्चों की फिंगर और हथेली की बायोमीट्रिक शिशु टीकाकरण करने में उनकी पहचान बताएगी। इस तकनीक से अभिभावक अब देश के किसी भी हिस्से में शिशु का टीकाकरण करवा सकेंगे। इसमें यह भी जानकारी मिलेगी कि बच्चे को कितने टीके कब-कब लगे। यह सब नागरिक रोग प्रतिरक्षक (एनआरपी) एकीकृत स्मार्ट टीकाकरण कवरेज निगरानी और विश्लेषण (यूनिसिका) परियोजना के तहत संभव होगा। इस परियोजना पर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) ऊना के निदेशक प्रो. एस सेल्वकुमार व एएसएनसीई चेन्नई की सहायक प्रोफेसर डॉ. कंचना काम कर रहे हैं।
परियोजना का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य प्रबंधन और टीकाकरण प्रणाली को एक प्रणाली में एकीकृत करना है, ताकि देश के किसी भी कोने में बिना दोबारा पंजीकरण बच्चों का टीकाकरण हो सके। बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण और पंजीकरण जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके बच्चों को टीकाकरण प्रदान करते समय एएनएम या आशा कार्यकर्ताओं द्वारा मैनुुअल डाटा प्रविष्टि और सत्यापन प्रक्रिया को कम व समाप्त करना है। इस परियोजना के प्रथम चरण के तहत हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु राज्य के लिए वर्तमान प्रणाली विकसित की गई है। इसमें एक एंड्रायड एप तैयार किया है। इससे ऑटो जनरेट की गई कार्य योजनाएं, एएनएम के लिए देय सूची, बारकोड स्कैनिंग का उपयोग कर लाभार्थियों का प्रमाणीकरण किया जा सकता है।
एप में इनबिल्ट बार कोड स्कैनर का उपयोग करके टीका पंजीकरण हो सकेगा। इसी एप से एएनएम के माध्यम से सर्वर में वास्तविक समय में डाटा अपलोड और डाउनलोड किया जा सकता है। परियोजना के तहत एक पोर्टल तैयार किया है। इसमें आने वाले डाटा में गलत सूचनाओं की जानकारी मिलती है। परियोजना का पहला चरण पूरा हो गया है। इस संबंध में आईआईआईटी ऊना के निदेशक प्रो. एस सेल्वकुमार ने बताया कि जल्द ही तीसरे सहयोगी द इनक्लीन ट्रस्ट इंटरनेशनल नई दिल्ली के साथ परियोजना के दूसरे चरण में भाग लिया जाएगा। चरण एक में सफलतापूर्वक प्रदर्शित प्रौद्योगिकियों को अन्य राज्यों में भी बढ़ाया जाएगा।
परियोजना पर खर्च हो रहा 1.06 करोड़
इस परियोजना के लिए बायोटेक्नोलाजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल और बिल एंड मालिंडा गेट्स फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से कुल 1.06 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।