लोगों के लिए खतरे का सिग्नल बन चुकीं लाल बसें अब शहर की सड़कों पर नजर नहीं आएंगी। एक के बाद एक बसों में आग लगने की घटनाओं और इनके आधे रास्ते में हांफने के बाद एचआरटीसी प्रबंधन होश में आया है।
निगम प्रबंधन ने लाल बसों को राजधानी से रिप्लेस करने का फैसला लिया है। लाल बसों के स्थान पर शहर में नई बसें चलाने की योजना है। हालांकि यह सब लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद ही हो पाएगा।
जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत राजधानी में लोकल रूटों पर चल रही लाल बसें अब मैदानी इलाकों में चलेंगी। रिप्लेस करने से पहले लाल बसों की आवश्यक मरम्मत करवाई जाएगी।
राजधानी की कठिन भौगोलिक स्थिति के चलते लाल बसों ने तय समय से पहले ही दम तोड़ना शुरू कर दिया है। लाल बसों की फिक्स लाइफ साढ़े चार लाख किलोमीटर है। लेकिन ये बसें दो लाख किलोमीटर चलने पर ही जवाब दे गई हैं।