आईजीएमसी अस्पताल आने वाले सभी मरीजों का अब बेहतर उपचार हो पाएगा। मरीजों को अब पहले की तरह रेन शेल्टर या खुले में ईलाज नहीं करवाना पड़ेगा।
‘अमर उजाला’ के 26 मार्च के अंक में ‘रेन शेल्टर में तड़प रहे मरीज’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद आईजीएमसी अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया है।
आईजीएमसी तमाम मरीजों की सूची बना रहा है। इनके लिए डॉक्टरों, दवाओं की व्यवस्था की जा रही है। यही नहीं, जिन मरीजों के पास राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना कार्ड या आईआरडीपी कार्ड नहीं है, उन्हें गरीब मरीज वेलफेयर फंड से पांच हजार की आर्थिक मदद दी जाएगी।
आम जनता भी इनकी मदद के लिए आगे आई है। इनमें से अधिकांश मरीज कैंसर से पीड़ित हैं। वार्ड में बिस्तर न मिलने के कारण रेन शेल्टर में रहकर उपचार करवाना पड़ रहा है।
दवाओं पर भी पैसा खर्च करना पड़ रहा है। इनमें से एक मरीज भगत राम को टांग में तकलीफ थी। इनके आगे पीछे कोई नहीं है।
इस बात को भी ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया। भगत राम की मदद के लिए लोग आए हैं और अस्पताल प्रबंधन से संपर्क भी किया है।
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि रेन शेल्टर में रह रहे मरीजों को हर संभव सहायता दी जा रही है। इनमें से अधिकांश कैंसर के मरीज हैं।
जिनके पास हेल्थ कार्ड या बीपीएल कार्ड नहीं हैं, उन्हें अस्पताल के गरीब मरीज वेलफेयर फंड से पांच हजार तक की सहायता दी जा रही है।
ऐसे मरीजों की सूची तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा सीएम रिलीफ फंड , राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना, राष्ट्रीय बाल सुरक्षा योजना, जननी सुरक्षा योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।