हिमाचल से इंटर स्टेट रूटों पर तीन साल पुरानी बसें नहीं दौड़ेंगी। बेहतर माइलेज और यात्रियों की सुविधा के लिए निगम प्रबंधन ने निर्णय लिया है। परिवहन मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
बावजूद इसके कोई निगम प्रबंधक इंटर स्टेट रूटों पर पुरानी बस भेजता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। प्रदेश में एचआरटीसी के 27 डिपो हैं। इनके विभिन्न करीब 2400 रूटों पर 2900 से अधिक बसें दौड़ रही हैं।
इनमें साधारण बसें, डीलक्स, सेमी डीलक्स, जेएनएनयूआरएम और वोल्वो बसें शामिल हैं। निगम चंडीगढ़, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड आदि राज्यों के लिए सेवाएं दे रहा है। पंजाब और दिल्ली के लिए निगम प्रबंधन चार से पांच साल पुरानी बसें भेज देता था।
ऐसे में यात्रियों को परेशानी होती थी। कई बार बसें बीच रास्ते में हांफ जाती थीं तो कई बार इनकी छतें टपकना शुरू कर देती थीं। बसें पुरानी होने से माइलेज भी बेहतर नहीं आती थी। ऐसे में निगम प्रबंधन ने इंटर स्टेट रूटों पर तीन साल से पुरानी बसें न भेजने का निर्णय लिया है। नई बस को तीन साल तक लंबे रूटों पर दौड़ाया जाएगा। इसके बाद ये बसें लोकल रूटों पर चलेंगी।
रोजाना 1.15 लाख लीटर डीजल की खपत
प्रदेश में एचआरटीसी बसें रोजाना करीब 1.15 लाख लीटर डीजल पी रही हैं। पुरानी बसें लोकल रूटों पर दो से ढाई किलोमीटर प्रति लीटर माइलेज दे रही हैं, जबकि नई बसें तीन से साढ़े तीन किलोमीटर प्रति लीटर माइलेज दे रही हैं। लंबे रूटों पर तीन साल तक की बसें चार से साढ़े चार किलोमीटर प्रति लीटर माइलेज दे रही हैं। वोल्वो बसें तीन से सवा तीन किमी प्रति लीटर माइलेज दे रही हैं।
इंटर स्टेट रूटों पर तीन साल से पुरानी बसें नहीं चलाई जाएंगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं।- जीएस बाली, परिवहन मंत्री