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अब प्रमाण पत्र के लिए नहीं भटेंगे शहरवासी

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प्रमाणपत्र के लिए अब पूर्व पार्षद की रिपोर्ट भी मान्य
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एमसी के पत्र पर जिला प्रशासन ने जारी किए निर्देश, नहीं काटने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर
पटवारी से भी ले सकते हैं पूर्व पार्षदों की मदद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। स्थायी पत्ते, हिमाचली समेत अन्य प्रमाण पत्रों के लिए अब पूर्व पार्षद की रिपोर्ट भी मान्य होगी। नगर निगम की ओर से इस बारे में लिखे पत्र के बाद जिला प्रशासन ने एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
इसमें सभी अधिकृत अधिकारियों को हिमाचल प्रदेश लैंड रिकॉर्ड चैप्टर 28 में दिए प्रावधानों के अनुसार लोगों को जल्द प्रमाण पत्र देने के निर्देश दिए हैं। शहर में नगर निगम पार्षदों का कार्यकाल 18 जून को खत्म हो चुका है। इसके बाद से शहर में आय, बीपीएल, हिमाचली, स्थायी पत्ते, बेरोजगारी समेत अन्य प्रमाण पत्र बनाने का काम लगभग ठप हो गया है। इनमें से ज्यादातर प्रमाण पत्र तहसीलदार बनाते हैं।
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यह प्रमाण पत्र पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर बनाए जाते हैं। उधर पटवारी इस बारे में संबंधित वार्ड के पार्षद से इनक्वायरी रिपोर्ट लेते हैं जिसके बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार को जारी होती है। अब नगर निगम पार्षदों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पटवारी प्रमाण पत्र नहीं बना रहे थे। इनका तर्क था कि पार्षदों की जांच रिपोर्ट उन्हें नहीं मिल रही, ऐसे में उन्हें यह पता करना मुश्किल हो रहा है कि प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति संबंधित क्षेत्र का है या नहीं। लोगों की शिकायतें मिलने के बाद नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त बीआर शर्मा ने इस बारे में जिला प्रशासन को पत्र लिखा था। इसमें तहसीलदारों को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की थी ताकि प्रमाण पत्रों के लिए लोगों को भटकना न पड़े।
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एचपी लैंड रिकॉर्ड चैप्टर 28 में है प्रावधान
लोगों को प्रमाण पत्र जारी करने संबंधी दिशा निर्देश एचपी लैंड रिकॉर्ड चैप्टर 28 में दर्ज हैं। इसमें प्रमाण पत्र जारी करने के दो तरीके हैं। पहला पटवारी के पास उपलब्ध रिकॉर्ड और दूसरा लोकल जांच। पटवारी लोकल जांच के तौर पर संबंधित वार्ड के पार्षद की रिपोर्ट लेते हैं। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त बीआर शर्मा ने बताय कि रिकॉर्ड तो पटवारी के पास पहले की तरह है, लोकल इनक्वायरी के लिए पूर्व पार्षद, किसी संस्था के अध्यक्ष, उस क्षेत्र में रह रहे किसी राजपत्रित अधिकारी की रिपोर्ट भी लगाई जा सकती है। पटवारी इसे मान्य करेगा और तहसीदार को इसकी रिपोर्ट देगा। तहसीदार, नायब तहसीलदार या एसडीएम इसके आधार पर प्रमाण पत्र जारी कर सकते हैं। प्रशासन के निर्देश जारी होने के बाद अब उम्मीद है कि शहरवासियों की प्रमाण पत्र न बनने संबंधी शिकायतें दूर हो जाएंगी।
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