हिमाचल में दवा का निर्यात करने वाले उद्योगों को सर्टिफिकेट ऑफ फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट (सीओपीपी) जारी करने का अधिकार स्टेट ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी से छीन लिया है।
ये उद्योग विदेश के लिए दवा बनाने में सक्षम हैं या नहीं यह प्रमाणीकरण सिर्फ केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन ही कर सकेगा। इसके बिना विदेशों में दवा निर्यात नहीं की जा सकेगी।
हालांकि लाइसेंस जारी करने का अधिकार स्टेट अथॉरिटी को ही दिया गया है, लेकिन सीओपीपी के अभाव में लाइसेंस जारी नहीं हो सकेगा। डीसीसी की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।
ड्रग कंट्रोलर जनरल जीएन सिंह की ओर से जारी सूचना में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। फार्मा हब के रूप में उभरे हिमाचल में सीओपीपी की 400 फर्में हैं।
करीब 50 से 60 करोड़ का मासिक कारोबार यह फर्में करती हैं।