मनरेगा की तर्ज पर रोजगार गारंटी कार्ड बनाया जाएगा जबकि 170 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाएगी।
शहरी गरीबों को हिमाचल सरकार 360 दिन का रोजगार मुहैया कराएगी। सरकार ने इसके लिए लाल बहादुर शास्त्री कामगार एवं शहरी आजीविका योजना (लक्ष्य) शुरू की है। प्रथम चरण में यह योजना तीन साल चलेगी।
योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में विलय किए गए वार्डों और नगर पंचायतों में स्ट्रीट लाइटें, नालियों को पक्का करना, सेनिटेशन, रास्तों और सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। मनरेगा की तर्ज पर रोजगार गारंटी कार्ड बनाया जाएगा जबकि 170 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाएगी।
योजना के तहत 70 फीसदी प्रदेश सरकार जबकि 30 फीसदी बजट शहरी व नगर निकायों से लिया जाएगा। मनरेगा की तर्ज पर ही 70 फीसदी बजट लेबर कंपोनेंट जबकि 30 फीसदी निर्माण सामग्री पर खर्च होगा।
करवाए जाएंगे ये सारे काम
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि गांव में मनरेगा के तहत पानी के टैंक, सिंचाई, रास्तों का निर्माण होता था लेकिन शहरों में लक्ष्य योजना के तहत बिजली के खंभे लगाना, नालियों का निर्माण, सड़कें और रेलिंग आदि का काम कराया जाएगा।
इसलिए शुरू की योजना
प्रदेश सरकार गांवों के एरिया को शहरों में मर्ज कर रही है। गांव के अधिकांश लोग शहरों में आ रहे हैं। ये लोग मनरेगा के तहत दिहाड़ी लगाकर अपना रोजगार चलाते थे, लेकिन शहरी क्षेत्रों में शामिल होने से इनका रोजगार खत्म हो गया है। प्रदेश सरकार ने इन लोगों को रोजगार देने के लिए यह योजना शुरू की है।
नगर पंचायतों को मिलेंगे 10 लाख
शहरी विकास विभाग के निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया ने बताया कि हिमाचल में नई नगर पंचायतों को 10 लाख रुपये मिलेंगे। इसके अलावा गांव के जो एरिया नगर पंचायतों में मिले हैं, उन्हें भी विकास कार्यों के लिए राशि जारी की जाएगी।