हिमाचल प्रदेश की तीन नदियों के किनारे मलबा गिराना सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और 12 पावर प्रोजेक्टों को महंगा पड़ा है। राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन्हें चार दिन पहले ही नोटिस थमाया है।
यदि मलबा नहीं हटाया गया तो बोर्ड की ओर से इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के संकेत दिए जा रहे हैं। प्रदेश की सतलुज, रावी और ब्यास नदी के किनारे गिराए जाने वाले मलबे की जांच करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने तीन टीमें गठित की थीं।
तीनों टीमों ने अपनी जांच रिपोर्ट जुलाई के मध्य में ही बोर्ड को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद चार दिन पहले ही बीआरओ, पीडब्ल्यूडी सहित 12 पावर प्रोजेक्टों को नोटिस थमाया है।
अगर तत्काल मलबा नहीं हटाया गया तो बोर्ड की ओर से सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। बोर्ड प्रबंधन का कहना है कि जरूरत पड़ी तो कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
केदारनाथ त्रासदी से लिया सबक
केदारनाथ त्रासदी से सबक लेते हुए पीसीबी ने नदियों के किनारे गिराए जाने वाले मलबे की जांच कराने का निर्णय लिया था। ताकि प्रदेश में भारी बरसात की स्थिति में कोई बड़ी त्रासदी न होने पाए।