राजधानी शिमला में 14 मार्च 2016 से छह महीने के लिए वर्मिन घोषित बंदरों को मारने की मियाद बुधवार को खत्म हो गई। इसके साथ ही अब शिमला नगर निगम क्षेत्र में पीड़ा पहुंचाने वाले बंदर एक बार फिर पीड़क जंतु की सूची से बाहर हो गए हैं।
बड़ी बात यह है कि इस दौरान एक भी बंदर को नहीं मारा जा सका है। अब हमला करने पर किसी भी बंदर को मारा गया तो वन्य जीव क्रूरता अधिनियम के तहत वन विभाग कार्रवाई करेगा। वर्मिन घोषित होने के बाद अब तक बंदरों व अन्य जंगली जानवरों के हमले के करीब 70 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं।
इन मामलों में विभाग की ओर से हजारों रुपये मुआवजा भी जारी किया गया है। बता दें कि इससे पहले विभाग ने केंद्र सरकार से शिमला नगर निगम क्षेत्र में बंदरों को वर्मिन घोषित करने की मियाद को एक साल और बढ़ाने की मांग की थी। लेकिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से अब तक कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
बंदर मारने की पॉलिसी बदलेगी सरकार
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि हिमाचल सरकार बंदरों को मारने की पॉलिसी को बदलकर इसका सरलीकरण करेगी। सीएम ने कहा कि हर बंदर को डॉक्टर चेक नहीं कर सकता है। कोई प्रेगनेंट है या नहीं, यह जानना भी आसान नहीं है।
सीएम बुधवार को गेयटी थियेटर शिमला के बाहर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। एक सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि अगर कोई गोली चला रहा है तो उसे क्या पता है कि मादा बंदर प्रेगनेंट है या नहीं। उसे डॉक्टर के पास पेश करना पड़ेगा और सत्यापित करना पड़ेगा।
ऐसे में जो अड़चनें आती हैं, इन्हें दुरुस्त किया जाएगा। कुल्लू के रघुनाथ मंदिर पर सीएम वीरभद्र सिंह ने फिर दोहराया कि यह सार्वजनिक मंदिर है। इसमें सार्वजनिक कार्यक्रम होते हैं। यह निजी संपत्ति नहीं हो सकती है। हम चाहते हैं कि जो भी प्रबंधन हो, वह जवाबदेही से हो। सीएम ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेष ओलंपिक खेलों में विजयी बच्चों को सरकार सम्मानित करेगी।
वर्मिन एक्सटेंशन की मिल चुकी है मौखिक मंजूरी
प्रधान सचिव वन तरुण कपूर ने बताया कि केंद्र वर्मिन एक्सटेंशन की मौखिक मंजूरी दे चुका है। जल्द ही लिखित मंजूरी मिलने की उम्मीद है। बता दें कि बंदरों को मारने के खिलाफ कुछ एनजीओ हाईकोर्ट गए थे। मामला हाईकोर्ट में होने की वजह से वन विभाग ने बंदरों को मारने का कोई प्रयास नहीं किया।
महीने भर पहले बंदरों को मारने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने सारे मामलों को खारिज कर दिया। इस बीच विधानसभा में फिर से बंदरों के आतंक से लोगों और किसानों को हो रहे नुकसान पर हंगामा हुआ तो विभाग ने बंदर मारने पर तीन सौ रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में देने की घोषणा कर दी।
गुपचुप तरीके से एक प्रोटोकाल कागजों पर जारी कर दिया। प्रोटोकाल में भी ऐसे क्लॉज जोड़ दिए जिनकी वजह से बंदर मारने वाले के लिए ही मुसीबत हो जाती। लिहाजा, न तो लोगों ने बंदरों को मारा और न ही वन विभाग ने।
बंदरों की सामूहिक नसबंदी पर फोकस करेगा अब वन विभाग
बंदरों की सामूहिक नसबंदी के लिए वन विभाग अब नए सिरे से काम करेगा। पूरे ग्रुप की नसबंदी के बाद ही अगले ग्रुप को विभाग की टीम अपने टारगेट पर लगेगी। साथ ही इस काम के लिए जरूरत पड़ने पर अन्य विभाग भी मदद करेंगे। बुधवार को मुख्य सचिव वीसी फारका की अध्यक्षता में जंगली जानवरों से लोगों को हो रही परेशानी पर हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।
बैठक में इसके अलावा इस बात पर भी फैसला लिया गया कि अब पंचायती राज, पशुपालन, कृषि, शहरी विकास व वन विभाग मिलकर संयुक्त रूप से उन क्षेत्रों के लोगों को जागरूक करेंगे जहां बंदर पीड़क जंतु घोषित है। इस दौरान लोगों को बताया जाएगा कि बंदरों से कैसे बचाव किया जाए और बंदरों को विभाग नहीं बल्कि उन्हें ही मारना होगा।
प्रधान सचिव वन तरुण कपूर ने बताया कि बंदरों को वर्मिन घोषित करने की व्यवस्था एक्ट में है लेकिन उन्हें मारने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में जिन लोगों को परेशानी हो, उन्हें ही बंदरों को मारना होगा। इसके अलावा बंदरों के लिए फीडिंग प्वाइंट बनाने पर भी चर्चा हुई। विभागों को कहा गया कि ऐसे प्वाइंट चिह्नित करें, जहां बंदरों को फीड करने की व्यवस्था की जाए।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने शहरी विकास, ग्राम्य विकास व पंचायती राज विभाग को कूड़े के निस्तारण और खुले में खुले कूड़ेदान को बंद करने के लिए निर्देश दिए। इसके अलावा जंगली सुअर, नील गाय व सांभर को भी वर्मिन घोषित करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखा जाएगा।
भारत सरकार ने छह महीने और एक साल के लिए जारी की अधिसूचना
भारत सरकार ने 14 मार्च 2016 को शिमला शहर में बंदरों को छह महीने के लिए वर्मिन घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। अन्य 38 तहसीलों में एक साल के लिए बंदरों को पीड़क घोषित करने की अधिसूचना 24 मई 2016 को जारी की गई थी। इसके बाद बुधवार को हिमाचल सरकार की ओर से इन क्षेत्रों में बंदरों को मारने वाले के लिए इनाम की घोषणा कर दी गई।
इन तहसीलों में बंदरों को घोषित किया वर्मिन
शिमला शहर के अलावा प्रदेश की डलहौजी, भटियात, सिंहुता, चंबा, नूरपुर, इंदौरा, फ तेहपुर, ज्वाली, कांगड़ा, पालमपुर, बड़ोह, भरवाईं, अंब, ऊना, हरोली, बंगाणा, घुमारवीं, नयना देवी, बिलासपुर सदर, नम्होल, शिमला ग्रामीण, रामपुर, नेरवा, पच्छाद, राजगढ़, रेणुका, शिलाई, कमरऊ, मनाली, कुल्लू, सैंज, बड़सर, बिझड़ी, नालागढ़, कसौली, सोलन, दाड़लाघाट और सुंदरनगर तहसीलें।