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सबसे ज्यादा सीटें देने के बावजूद सीएम के लिए इस जिले से किसी ने नहीं किया दावा

Sun, 24 Dec 2017 01:28 PM IST
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला
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सियासी चौसर पर हमेशा किंग मेकर के रूप में राजनीतिक भूमिका निभाने वाले कांगड़ा ने इस बार भाजपा को बंपर 11 विधानसभा सीटें जिताकर दीं, लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए सूबे का सबसे बड़ा जिला दावेदारी से दूर रहा। भाजपा के 11 विधायकों में से किसी ने भी मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश नहीं किया।
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कांगड़ा भाजपा के पितामह कहे जाने वाले शांता कुमार ने भी सबसे ज्यादा सीटें देने वाले कांगड़ा जिले की मुख्यमंत्री पद के लिए पैरवी नहीं की। दो दशक पहले कांगड़ा जिले से शांता कुमार ने मुख्यमंत्री बनकर पानी वाले सीएम के रूप में पहचान बनाई थी। दो दशक से राजनीतिक रंगमंच पर गुटबाजी की भेंट चढ़े कांगड़ा को सीएम पद नहीं मिला।

इस बार विधानसभा चुनाव में कांगड़ा की जनता ने गुटबाजी को दरकिनार कर बंपर जनादेश भाजपा को दिया। सूबे में सबसे ज्यादा 11 सीटों का योगदान कांगड़ा ने दिया, लेकिन यहां से किसी भी नेता ने मुख्यमंत्री पद के लिए पैरवी तक नहीं की।
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कांगड़ा में 11, मंडी में भाजपा को 9, कुल्लू से 3, हमीरपुर से 2, सोलन से 2, ऊना से 3, बिलासपुर से 3, शिमला से 3, सिरमौर से 3, चंबा से 4 और लाहौल-स्पीति से 1 सीट मिली। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से भाजपा को जनता ने 15 सीटें जिताकर दीं, लेकिन सबसे बड़ा जिला बड़े पद से महरूम रहा। 
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कांगड़ा के विधायकों को अपनी बात रखनी चाहिए थी

जिला कांगड़ा भाजपा अध्यक्ष संजय चौधरी का कहना है कि सीएम पद का चुनाव करना हाईकमान के अधिकार क्षेत्र में आता है। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है।

कांगड़ा के विधायकों को हाईकमान के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए थी। अगर कोई विधायक अपनी बात हाईकमान के समक्ष रखेगा, तभी उस पर विचार हो सकता है। विधायक कांगड़ा के लिए डिप्टी सीएम की बात भी कर सकते थे। 

कांगड़ा के विधायक बने रहते हैं एक-दूसरे के दुश्मन
शांता कुमार के पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल और ठाकुर रामलाल सहित वीरभद्र सरकार में अहम मंत्रालय संभालने वाले कांगड़ा जिले के शिवकुमार उपमन्यु का कहना है कि कांगड़ा ने कभी भी मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश ही नहीं की।

कांगड़ा के एमएलए हमेशा एक दूसरे के दुश्मन बनकर रहते हैं। इस बार कांगड़ा में भाजपा को 11 सीटें मिली लेकिन स्थिति पहले जैसी ही रही। 

दावेदारी पेश करना परंपरा नहीं
प्रदेश भाजपा मीडिया सह प्रभारी राकेश शर्मा का कहना है कि पार्टी में किसी भी पद के लिए दावेदारी पेश करना भाजपा की परंपरा नहीं है। अनुशासन की प्रतीकात्मक भाजपा में निर्णय हाईकमान लेता है, जो सभी को मान्य होता है।
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