सैनिक कल्याण विभाग के सौजन्य से 70 वर्ष से ऊपर के नॉन पेंशनर पूर्व सैनिकों के लिए आय का पेच समाप्त हो गया है। 60 से 70 वर्ष की आयु वाले नॉन पेंशनरों के लिए ही विभाग ने आय की सीमा तय की है। विभाग ने 60 से 70 वर्ष के बीच के नॉन पेंशनर पूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं की वार्षिक आय सीमा 35 हजार रुपये वार्षिक तय की है।
35 हजार से कम आय वाले 60 से 70 वर्ष तक के नॉन पेंशनर पूर्व सैनिकों को ही यह मासिक पेंशन मिलेगी। 70 वर्ष के ऊपर के नॉन पेंशनरों के लिए आय सीमा तय नहीं है। सूबे के नॉन पेंशनर पूर्व सैनिकों को सरकार तीन हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन देती है।
पूर्व सैनिकों की मृत्यु के बाद यह पेंशन उनकी विधवाओं को मिलती है। नॉन पेंशनर पूर्व सैनिक वे हैं, जिन्होंने भारतीय सेना से युद्धों में भाग लिया है और किसी कारणवश सेना छोड़कर या उन्हें घर भेज दिया गया है। ऐसे पूर्व सैनिकों के लिए सेना की तरफ से पेंशन का प्रावधान नहीं है, लेकिन प्रदेश सैनिक कल्याण विभाग के सौजन्य से ऐसे नॉन पेंशनर पूर्व सैनिकों को सरकार तीन हजार प्रतिमाह पेंशन देती है।
प्रदेश में करीब 1200 नॉन पेंशनर हैं, जबकि करीब 400 सैनिक विधवाएं शामिल हैं। सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर एसके वर्मा का कहना है कि 70 वर्ष की आयु से ऊपर के नॉन पेंशनरों के लिए कोई आय सीमा नहीं है। साठ से सत्तर साल तक के नॉन पेंशनरों की वार्षिक आय 35 हजार रुपये तक होनी चाहिए