मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि जब तक कैंपस में माहौल हिंसा मुक्त नहीं हो जाता, तब तक विवि और कॉलेजों में प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव नहीं होंगे। मेरिट के आधार पर ही एससीए का गठन होगा। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में यूजी में लागू सीबीसीएस को रोल बैक नहीं किया जाएगा। इसमें पेश आ रही परेशानी और खामियों को दूर किया जाएगा, सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।
शनिवार को एचपीयू में आयोजित एनएसयूआई के 45वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिंसा के कारण हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय देश भर में बदनाम हुआ है, इसलिए परिसरों में हिंसा किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी। शिक्षकों को भी उन्होंने साफ हिदायत दी कि वे गरिमा को समझें, यदि कोई शिक्षक हिंसा को बढ़ावा देने की गतिविधियों में पाया गया तो उसे बाहर किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने धूमल के बयान पर पलटवार किया कि वे पता नहीं कौन सी किताब के आंकड़े बता रहे हैं, किसानों को सब्सिडी दी जा रही है। केंद्र की योजनाओं का जब पैसा आएगा तो ही वे आगे सब्सिडी दे पाएंगे। उन्होंने प्रदेश सरकार पर लगे कर्ज लेने के आरोपों पर कहा कि केंद्र और प्रदेशों की सभी सरकारें कर्ज लेती है, उसे वापस भी करती है। इसमें कुछ नया नहीं है, सरकारें ऐसे ही चलती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे छात्र राजनीति के खिलाफ नहीं है, मगर अनुशासन में रहकर हो, परिसरों में हिंसा न हो। उन्होंने कहा कि कम्यूनिस्ट और सोशलिस्ट होना फैशन हो गया है। मैं स्वयं लेफ्टिस्ट था, इंडो सोवियत सोसायटी का लगातार अध्यक्ष रहा। छात्रों को चाहिए कि वे जोश में होश न खोएं। अपने विवेक से काम लें।
परिसर में शांति, आपसी भाईचारा बनाए रखें। प्रेम सहयोग और भाईचारे से ही देश आगे बढ़ता है। विश्वविद्यालय हिंसा नहीं ज्ञानवर्धन का स्थान है। विचार अलग हो सकता है, मगर वन बॉडी, वन माइंड और वन थॉट को फॉलो कर परिसरों में शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि मेरे लिए पूरा हिमाचल एक है, इसे बांटने वालों के मैं खिलाफ हूं,। हमारा प्रदेश एक है, देश एक है और राष्ट्रीय ध्वज एक है।