प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की सड़कों के लिए 21 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया है। सीमा तक पहुंचने के लिए ये सड़कें अहम माना जाती हैं और इनकी समय पर मरम्मत की जानी अनिवार्य हैं। वर्ष 2006 के बाद यह मद जनजातीय उप योजना का ही हिस्सा बना दिया गया था।
जनजातीय क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने कुल 21 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार कर केंद्र सरकार की मजूरी के लिए भेजा है। इससे किन्नौर और लाहौल-स्पीति की सड़कों की हालत सुधारी जानी हैं। अभी तक बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्लान (बीएडीपी) में सड़कें बनाने और मरम्मत का काम किया जाता रहा है।
पड़ोसी देश चीन की सीमा से सटे मार्गों के लिए बीएडीपी के में केंद्र सरकार धनराशि मुहैया करवाती रही है लेकिन अब यह राशि बंद कर दी गई है। इस कारण से राज्य सरकार ने किन्नौर और लाहौल-स्पीति क्षेत्र की उन सड़कों के लिए 21 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा है, यहां से सीमा तक पहुंचा जा सकता है।
कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा ने बताया कि किन्नौर और लाहौल-स्पीति की पड़ोसी देश चीन सीमा तक पहुंचने वाली सड़कें बनाने और सड़कों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार ने 21 करोड़ का प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजा है।
प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में पहले वर्ष 1998 से 2002 तक बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्लान (बीएडीपी) में सड़कें बनाने और मरम्मत का काम किया जाता था। इसके बाद यह कार्य जनजातीय उपयोजना में किया जाने लगा।