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कहां गए 400 करोड़, सरकार को नहीं पता

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हिमाचल प्रदेश में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को पिछले चार वर्षों में चार अरब से अधिक विदेशी मदद मिल चुकी है। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आए हैं।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास इसकी विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध है। प्रदेश के तमाम एनजीओ को विश्व के कई देशों से जमकर वित्तीय मदद मिल रही है, लेकिन अहम सवाल यह है कि उस रकम को कहां खर्च किया जा रहा, इसका प्रदेश सरकार के पास कोई ठोस आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

कहां खप रहा विदेशी पैसा

देश का एक छोटा सा राज्य होने के बावजूद हिमाचल के एनजीओ को विश्व के तमाम देशों की ओर से बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद की जा रही है। पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड से अधिक रकम हिमाचल प्रदेश को मिल रही है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से तैयार की गई सूची में इसका जिक्र है। कहां खप रहा विदेशी पैसा इसकी जानकारी प्रदेश सरकार के पास न होने से कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा हो रहा है।

केंद्र कई राज्यों के एनजीओ की जांच सीबीआई और राज्य पुलिस को भी सौंप चुका है। हालांकि, इसमें हिमाचल प्रदेश के किसी एनजीओ का नाम नहीं है।

विदेशों से प्रदेश के एनजीओ को मिली मदद

वर्ष--------------------एनजीओ संख्या--------राशि
2010-2011-------------106-----------------1.28 अरब
2011-2012-------------112------------------1.25 अरब
2012-2013-------------82--------------------1.72 अरब
2013-2014--------------06-------------------63 लाख

23 एनजीओ का पंजीकरण रद्द

हिमाचल प्रदेश के 23 एनजीओ का फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) के तहत पंजीकरण निरस्त हो चुका है। समय से रिटर्न न भरने और अनियमितताओं पाए जाने की स्थिति में केंद्र सरकार की ओर से उक्त एनजीओ की एफसीआरए रद्द कर दी है, लेकिन प्रदेश स्तर पर इसके लिए आज तक कोई हलचल नहीं है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव पी मित्रा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में काम करने वाले एनजीओ को हर साल कितनी आर्थिक मदद मिल रही है, इसकी प्रदेश के पास कोई जानकारी नहीं है। अगर केंद्र की ओर से कोई जांच कराई गई है तो इसकी भी सूचना अभी तक प्रदेश को नहीं आई है।
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चार साल पहले किया था सर्वे

अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के आर्थिक सलाहकार प्रदीप चौहान ने बताया कि चार साल पहले हिमाचल के एनजीओ पर एक सर्वे किया था, जिसमें 39 हजार एनजीओ पंजीकृत पाए गए।

इसमें से 22 फीसदी एनजीओ ही धरातल पर पाए गए, जबकि 78 प्रतिशत एनजीओ डेड थे। विदेशों से मदद लेने वाले 160 एनजीओ थे। इस सर्वे पर आईबी ने भी इनपुट लिया था।
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