घबराहट और जल्दबाजी का फायदा उठा सकते है साइबर ठग
साइबर ठग लोगों की घबराहट और जल्दबाजी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। संदेश में बैंक से जुड़ी जानकारी और लेनदेन की रकम का उल्लेख होने से लोग इसे असली समझ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर संदेश में लिखा हो सकता है कि 14 अक्तूबर 2026 को खाते से 25,480 रुपये कटे हैं और यदि आपने यह लेनदेन नहीं किया है तो नो लिखकर जवाब दें। ऐसे संदेश का मकसद व्यक्ति को बिना जांच किए तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाना होता है। जवाब मिलने के बाद ठग बातचीत आगे बढ़ाकर लोगों को फर्जी लिंक भेजने, फोन करने या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
अनजान नंबर से आए बैंक अलर्ट पर बिना सत्यापन के जवाब न दें
हालांकि, केवल नो लिखकर जवाब देने से ही खाते से पैसे निकल जाना तय नहीं है। असली खतरा इसके बाद ठगों के साथ होने वाली बातचीत और उनके बताए निर्देशों का पालन करने में है। इसलिए किसी भी अनजान नंबर से आए बैंक अलर्ट पर बिना सत्यापन के जवाब नहीं देना चाहिए। हिमाचल प्रदेश पुलिस के साइबर एक्सपर्ट एएसपी नरवीर सिंह राठाैर का कहना है कि खाते से वास्तव में पैसे कटे हैं या नहीं, इसकी पुष्टि बैंक की आधिकारिक मोबाइल एप, नेट बैंकिंग या पासबुक से करनी चाहिए।
संदिग्ध संदेश में दिए गए लिंक या फोन नंबर का इस्तेमाल न करें
संदिग्ध संदेश में दिए गए लिंक या फोन नंबर का इस्तेमाल न करें। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें। बैंक खाते में किसी अनधिकृत लेन-देन की जानकारी मिले तो तुरंत बैंक को सूचित करें।
साइबर ठगी पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें
यदि साइबर ठगी हो जाती है तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। शिकायत केंद्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी दर्ज कराई जा सकती है। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने में मदद मिल सकती है। लोगों को सलाह दी गई है कि बैंक से जुड़ा कोई भी संदेश मिलने पर घबराने के बजाय पहले उसकी सत्यता जांचें और सतर्कता के साथ कार्रवाई करें।