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विस चुनाव में निर्णायक रहेगी महिला वोटरों की भूमिका, जानिए क्यों

Fri, 13 Oct 2017 05:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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सूबे की महिलाओं का राजनीतिक नेतृत्व में भले ही हिस्सा कम हो, लेकिन सरकार किसकी बनेगी यह प्रदेश की महिलाएं ही तय करती हैं। प्रदेश के पिछले चुनावों के आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं कि सूबे में सरकार बनाने में महिला वोटरों की हिस्सेदारी निर्णायक रही है। 
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मतदाता सूची में पुरुषों की संख्या हमेशा महिलाओं से ज्यादा रहती है, लेकिन वोट देने के दिन घरों से महिलाएं ही ज्यादा निकलती हैं। साल 2012 के विधानसभा चुनावों के दौरान प्रदेश में पुरुष मतदाताओं की संख्या 45 लाख 33 हजार 713 थी। 

इनमें पुरुष वोटर 23 लाख 22 हजार 266 थी, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 22 लाख 11 हजार 447 थी। बात जब मतदान की आई तो वोट डालने के लिए सिर्फ 16 लाख 46 हजार 899 पुरुश मतदाता ही पहुंचे। 
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मतदान करने वाली महिलाओं की संख्या 17 लाख 02 हजार 953 रही। इसी तरह 2007 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी कुल 45 लाख 44 हजार 166 मतदाताओं में से 15 लाख 97 हजार 473 पुरुष मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।  वहीं, मतदान करने वाली महिला मतदाताओं की संख्या 2007 में भी पुरुषों की अपेक्षा करीब एक लाख ज्यादा रही।
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इस बार महिला-पुरुष वोटरों की संख्या लगभग बराबर

2017 के विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने नई मतदाता सूची जारी की है। इसके अनुसार सूबे के कुल 49.50 लाख मतदाताओं में 24.09 लाख पुरुष और 24.07 लाख महिला मतदाता हैं। चूंकि इस बार महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या में अंतर कम हैं, ऐसे में आयोग पुरुषों खासकर पहली व दूसरी बार मतदान करने वाले युवाओं को वोट करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी पुष्पेंद्र राजपूत कहते हैं कि यह अच्छी बात है कि महिला मतदाता ज्यादा वोट देने घरों से निकलती हैं। लेकिन प्रयास किया जाएगा कि इस बार महिलाएं और पुरुष ज्यादा से ज्यादा संख्या में मतदान करने के लिए निकलें। 
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