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फोरलेन प्रभावित सड़कों पर, न मुआवजा मिला न पुर्नवास, अब चुनावों में सुनाई देगी गूंज

Fri, 13 Oct 2017 05:55 PM IST
रितेश गुलेरिया/अमर उजाला, बिलासपुर
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हिमाचल के कई इलाकों में विकास के नाम पर जमीन सरकार ने ले ली। न उचित मुआवजा मिला और न ही विस्थापितों और प्रभावितों का पुनर्वास हो सका। हालत यह है कि बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और सोलन जैसे जिलों में हजारों लोग सड़क पर आ गए हैं। न सूबे में कांग्रेस सरकार इसका कोई हल निकाल सकी है और न ही भाजपा नीत केंद्र की एनडीए सरकार इनकी फरियाद सुन रही है। लोग आए दिन सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। 
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तीन जिलों के बीच से गुजरने वाली किरतपुर-मनाली फोरलेन हाईवे परियोजना हजारों लोगों को सड़क पर ले आई है। जमीन अधिग्रहण से शुरू हुआ सिलसिला ब्लास्टिंग के धमाकों में जी का जंजाल बन गया है। पहले जमीन गई, उसके बाद मकानों की दीवारें दरारों से पट गईं।

आलम ये है कि आशियाने कब भरभराकर बिखर जाएं कहा नहीं जा सकता। डरे सहमे लोग रात को सो भी नहीं पा रहे। इस सब के बावजूद उनकी न तो प्रदेश सरकार ने सुनवाई की और न ही केंद्र सरकार से संबंधित मामलों का निपटारा हो पाया। उल्टे, पुश्तैनी जमीन खोने के बाद घरों पर संकट से परेशान लोगों ने आवाज उठाई तो उन पर मुकदमे दर्ज हो गए। 
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ब्लास्टिंग हो रही है, बच्चे स्कूल न भेजें
बिलासपुर के गांव कैंची मोड़, मलावर, तुन्नू, धराड़सानी, कल्लर, बागठेडू, पनोह समेत आसपास के दर्जनों गांव ऐसे हैं, जो हाईवे अथॉरिटी की अधिग्रहीत भूमि के दायरे से बाहर होने पर भी दहशत में हैं। पहाड़ तोड़ने के लिए की जा रही ब्लास्टिंग से घरों पर खतरे के साथ आवाजाही के रास्ते भी बंद हो गए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार उनसे कहा जाता है, ब्लास्टिंग हो रही है लिहाजा वे अपने बच्चों को स्कूल न भेजें। गरा भगेरी गांव की महिला मंडल प्रधान विमला शर्मा, रोशनी देवी, वंदना देवी, नीलम कुमारी, रंजना देवी, अंबिका देवी, सुदेश, सुषमा, अनीता, राज कुमारी, रत्नी देवी, फूलां देवी ने कहा उनके गांव के दर्जन भर घरों पर खतरा है। रास्ता टूट गया है। उनसे कहा जा रहा है कि जब तक रास्ता नहीं बनता, बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दें।
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सरकार को ताले, मुख्य सचिव को भेजीं चूड़ियां

प्रशासनिक उदासीनता से गुस्साए प्रभावित ग्रामीणों ने मुख्य सचिव को चूड़ियां भेजकर विरोध जताया। सरकार के प्रतिनिधियों को काले झंडे दिखाकर रोष जताया। सुनवाई न होने पर लोगों ने सरकार को तमाम विभाग बंद करने की मांग को लेकर ताले भी भेजे। प्रदेश सरकार के अलावा भारत सरकार को भी 1200 से अधिक पत्र भेजे जा चुके हैं। 

भूकंप जैसे बन जाते हैं हालात 
प्रस्तावित फोरलेन से सटे आवासीय इलाके निर्माण में लगी मशीनों के चलने पर भूकंप आने जैसे हालात का सामना करते हैं। कैंची मोड़ निवासी मीरा शर्मा, शिव कुमार शर्मा, मेहला निवासी राजकुमार, जीतराम और नंदलाल कहते हैं, मशीनों के चलते ही मकान हिलने लगते हैं। कई बार तो घरों से बाहर निकलना पड़ता है। गांव के करीब डेढ़ दर्जन घरों पर खतरा मंडरा रहा है। 

स्वारघाट में भी भारी नुकसान
स्वारघाट क्षेत्र के गांव थापना और नरली के दर्जनों लोगों के पुराने और नए घर किरतपुर-नेरचौक फोरलेन सड़क निर्माण की बलि चढ़ गए हैं। थापना के लोगों में रामपाल, सुखराम, जगदीश चंद, प्रकाश चंद, वार्ड सदस्य थापना वार्ड शिव देई, नंदलाल, शंभूराम, कृष्णा, रंगीराम, दीपराम, अशोक कुमार और मदन लाल का कहना है कि पुराने और नए मकान इलेक्ट्रिक ब्लास्टिंग से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

थापना के समीपवर्ती गांव नरली में भी आधा दर्जन घरों में दरारें आ गई हैं। नरली गांव के देवीराम, रमेश चंद, जगतराम और कमल किशोर ने कहा कि उनके घर थापना नरली टनल में ब्लास्टिंग से घर थर्रा जाते हैं।

श्री नयनादेवी के विधायक रणधीर शर्मा ने बताया कि मामले में कंपनी को मरम्मत करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया, लेकिन प्रदेश सरकार की नाकामी रही कि वह लोगों के साथ न्याय नहीं कर पाई। 

सदर के विधायक बंबर ठाकुर ने कहा कि उन्होंने समय-समय पर मुद्दा प्रदेश सरकार से उठाया है। कहा कि कई बेरोजगार युवाओं को फोरलेन निर्माण के दौरान रोजगार दिया गया है। विस्थापितों और प्रभावितों के लिए प्रदेश सरकार गंभीर है।

जमीन के साथ मकान भी गया, अब उचित मुआवजे को तरसे

पूर्व सांसद सुरेश चंदेल ने कहा कि सदर के विधायक और कंपनी की मिलीभगत से फोरलेन कार्य प्रभावित हुआ है। विधायक के निजी स्वार्थ पूर्ति के कारण विस्थापित और प्रभावित दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। सरकार की नालायकी से सैकड़ों लोग सड़क पर आ गए हैं।

किरतपुर-मंडी-मनाली फोरलेन निर्माण के तहत मंडी जिला के सुंदरनगर उपमंडल में ही फोरलेन का काम शुरू हुआ है। यहां लोगों की जमीन गई और मकान चले गए, लेकिन न तो उन्हें नियमानुसार मुआवजा मिला और न ही विस्थापित का दर्जा।

यहां तक कि फोरलेन के निर्माण में विस्थापित लोगों को मुआवजा भी अलग-अलग भू-अधिग्रहण अधिनियम के तहत मिला है। मांग को लेकर महीनों संघर्ष भी किया, लेकिन नेताओं और प्रशासन से झूठे आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। 

नियम चार गुना, मिला दो गुना मुआवजा 
अब तक सुंदरनगर उपमंडल में फोरलेन निर्माण के प्रभावित परिवार को पहले तो भू-अधिग्रहण अधिनियम 1956 के तहत नोटिस मिले। बाद में उनकी संपत्ति का आकलन करने के बाद लगभग सवा गुना मुआवजा मिला।

इस बीच जिन अन्य लोगों को 1 जनवरी 2015 से लागू भू-अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत दो गुना तक मुआवजा मिला, जबकि भू-अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत प्रदेश सरकार को चार गुना तक मुआवजा देने का अधिकार था,, जिसे सरकार ने लागू नहीं किया।
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उजड़ गए 150 परिवार, मलबे का ढेर बन गया बाजार

सुंदरनगर फोरलेन प्रभावित जन आंदोलन समिति के प्रधान यादविंद्र पुरी, सदस्य घनश्याम महाजन, ब्रस्तु राम, लक्ष्मण दास, मुकेश चंदेल, कमल खुराना और सुरजीत सिंह ने कहा कि एक ही फोरलेन निर्माण में दो कानूनों के तहत मुआवजा देना न्यायसंगत नहीं है।

जब भारत सरकार ने भू-अधिग्रहण कानून 2013 लागू कर दिया था तो न प्रदेश सरकार ने इस कानून को दरकिनार कर पुराने नियम के तहत मुआवजा देकर लोगों से अन्याय किया।

परवाणू-शिमला एनएच-5 पर फोरलेन के पहले चरण में करीब डेढ़ सौ परिवार उजड़ गए हैं। इस चरण में भरापूरा धर्मपुर बाजार मलबे के ढेर में तब्दील हो गया है। पर्यटकों के हुजूम से भरे रहने वाले ढाबे बेरौनक हैं और सड़क पर मलबे के ढेर के अलावा कुछ नहीं बचा है। धर्मपुर बाजार में सौ के करीब कारोबारियों की रोजी रोटी चल रही थी।

उन्हें सामान समेट कर नई जगह के लिए दरबदर होना पड़ रहा है। मुआवजा भी ऊंट के मुंह में जीरा समान मिला है। धर्मपुर के अलावा परवाणू से चंबाघाट तक सड़क किनारे से कब्जे हटाए गए थे।

करीब सौ मीटर की दूरी तक बसे लोग अभी भी विस्फोट और खनन से इनके घरों में दरारें आ गई हैं। फोरलेन निर्माता कंपनी के प्रोजेक्ट प्रबंधक देवाशीष पात्रा का कहना है कि कंपनी ने तय नियमों के अनुरूप काम किया है और हाईकोर्ट, प्रशासन व राजस्व के निर्देशों पर कब्जे हटाए गए हैं।
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