हिमाचल के कई इलाकों में विकास के नाम पर जमीन सरकार ने ले ली। न उचित मुआवजा मिला और न ही विस्थापितों और प्रभावितों का पुनर्वास हो सका। हालत यह है कि बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और सोलन जैसे जिलों में हजारों लोग सड़क पर आ गए हैं। न सूबे में कांग्रेस सरकार इसका कोई हल निकाल सकी है और न ही भाजपा नीत केंद्र की एनडीए सरकार इनकी फरियाद सुन रही है। लोग आए दिन सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
तीन जिलों के बीच से गुजरने वाली किरतपुर-मनाली फोरलेन हाईवे परियोजना हजारों लोगों को सड़क पर ले आई है। जमीन अधिग्रहण से शुरू हुआ सिलसिला ब्लास्टिंग के धमाकों में जी का जंजाल बन गया है। पहले जमीन गई, उसके बाद मकानों की दीवारें दरारों से पट गईं।
आलम ये है कि आशियाने कब भरभराकर बिखर जाएं कहा नहीं जा सकता। डरे सहमे लोग रात को सो भी नहीं पा रहे। इस सब के बावजूद उनकी न तो प्रदेश सरकार ने सुनवाई की और न ही केंद्र सरकार से संबंधित मामलों का निपटारा हो पाया। उल्टे, पुश्तैनी जमीन खोने के बाद घरों पर संकट से परेशान लोगों ने आवाज उठाई तो उन पर मुकदमे दर्ज हो गए।
ब्लास्टिंग हो रही है, बच्चे स्कूल न भेजें
बिलासपुर के गांव कैंची मोड़, मलावर, तुन्नू, धराड़सानी, कल्लर, बागठेडू, पनोह समेत आसपास के दर्जनों गांव ऐसे हैं, जो हाईवे अथॉरिटी की अधिग्रहीत भूमि के दायरे से बाहर होने पर भी दहशत में हैं। पहाड़ तोड़ने के लिए की जा रही ब्लास्टिंग से घरों पर खतरे के साथ आवाजाही के रास्ते भी बंद हो गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार उनसे कहा जाता है, ब्लास्टिंग हो रही है लिहाजा वे अपने बच्चों को स्कूल न भेजें। गरा भगेरी गांव की महिला मंडल प्रधान विमला शर्मा, रोशनी देवी, वंदना देवी, नीलम कुमारी, रंजना देवी, अंबिका देवी, सुदेश, सुषमा, अनीता, राज कुमारी, रत्नी देवी, फूलां देवी ने कहा उनके गांव के दर्जन भर घरों पर खतरा है। रास्ता टूट गया है। उनसे कहा जा रहा है कि जब तक रास्ता नहीं बनता, बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दें।