सरकार पहले भी अधिकतर निगमों-बोर्डों में नियुक्तियां कर चुकी है और जो बचे-खुचे हैं, उनमें नई ताजपोशियां कर सकती है। मंडी लोकसभा सीट के अलावा अर्की, जुब्बल-कोटखाई और फतेहपुर विधानसभा हलकों में हार के बाद प्रदेश भाजपा सरकार हर स्तर पर मंथन कर रही है।
हिमाचल प्रदेश में बोर्डों और निगमों में नई नियुक्तियां कर जयराम सरकार असंतुष्टों को साध सकती है। सरकार और संगठन में उचित स्थान नहीं मिलने की बात कर रहे ऐसे कई भाजपा नेताओं को चुनावी साल में ओहदे मिल सकते हैं। कई भाजपा नेता खुद अपने लिए रिक्तियों की तलाश कर रहे हैं, वहीं कुछ नेताओं को प्रदेश सरकार भी मुख्यधारा में ला सकती है। इसका मकसद चुनाव से पहले डैमेज कंट्रोल को रोकना होगा।
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हालांकि, सरकार पहले भी अधिकतर निगमों-बोर्डों में नियुक्तियां कर चुकी है और जो बचे-खुचे हैं, उनमें नई ताजपोशियां कर सकती है। मंडी लोकसभा सीट के अलावा अर्की, जुब्बल-कोटखाई और फतेहपुर विधानसभा हलकों में हार के बाद प्रदेश भाजपा सरकार हर स्तर पर मंथन कर रही है। खुद चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी भितरघात की बात स्वीकारी थी। इसे भी हार के एक कारण के रूप में स्वीकार किया था।
इसके बाद जब भाजपा के कोर ग्रुप की शिमला में बैठक हुई तो उसमें भी यह मुद्दा उठा कि जिन नेताओं ने भितरघात किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे नेताओं के नाम भी अनुशासन समिति को भेजे गए हैं। इनमें कुछ पूर्व मंत्री, कुछ पूर्व विधायक और अन्य प्रभावशाली नेताओं के नाम भी शुमार हैं। इनमें कुछ नाम तो हाईकमान के लिए कार्रवाई को भी भेजने की बात की गई है। सूत्रों के अनुसार चुनावी साल में केंद्रीय नेतृत्व भी किसी तरह की कार्रवाई से बचना चाह रहा है।
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ऐसे नेताओं को मनाने और डैमेज कंट्रोल करने की राय भी प्रदेश भाजपा केंद्रीय नेतृत्व को दे चुका है। ऐसे में संभवतया भाजपा ऐसे नेताओं पर ही कार्रवाई करेगी जो किसी भी तरह से अगले चुनाव के लिए साथ चलने को तैयार नहीं है। जो साधे जा सकते हैं, उन्हें साथ लेकर चलना चाह रही है। उन्हें निगमों-बोर्डों और अन्य स्वायत्त संस्थानों में ओहदे भी दिए जा सकते हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इस संभावना से सहमति दर्ज की है कि डैमेज कंट्रोल से बचने के लिए कुछ नियुक्तियां की जा सकती हैं।