बजट न मिलने और सीमित संसाधनों का रोना रोने वाली हिमाचल पुलिस अपनी लेटलतीफ कार्यशैली की वजह से हर महीने खुद का लाखों रुपये का नुकसान कर रही है। अगर हिमाचल पुलिस कम से कम समय में पासपोर्ट आदि की वेरिफिकेशन करना शुरू कर दे तो हर साल उसे करीब पचास से साठ लाख रुपये मिल सकते हैं। दरअसल विदेश मंत्रालय ने कुछ समय पहले पुलिस
वेरिफिकेशन करने पर प्रति फाइल 150 रुपये और 21 दिन से ज्यादा समय लगने पर 50 रुपये प्रति फाइल देने का प्रावधान किया लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों की मानें तो प्रदेश की पुलिस को यही काम करने में औसतन 40 दिन का समय लग रहा है। इसका नतीजा यह है कि खुद पुलिस अपने हिस्से में आने वाले लाखों रुपये गंवा रही है।
वेरिफिकेशन जल्दी हो इसलिए शुरू हुई इनसेंटिव व्यवस्था- क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी प्रवीण मोहन सहाय बताते हैं कि इनसेंटिव देने की व्यवस्था इस उम्मीद से की गई थी कि पुलिस वेरिफिकेशन में तेजी आएगी। ऐसा होने से आवेदक को जल्दी पासपोर्ट जारी किया जा सकेगा।
देश के कई प्रदेशों की पुलिस ने पासपोर्ट वेरिफिकेशन के समय को काफी कम कर दिया। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की पुलिस ने वेरिफिकेशन के दिनों का दहाई का आंकड़ा भी पार करना बंद कर दिया लेकिन हिमाचल में वेरिफिकेशन का औसत अभी भी 40 दिन पर अटका हुआ है।