किस जमीन का सर्कल रेट क्या है, यह अब मोबाइल ऐप पर देखा जा सकेगा। यह भी देख सकेंगे कि इसे बेचने या खरीदने पर कितनी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। इसके लिए सर्कल रेट ऐप बनाई जा रही है। एक अन्य लैंड रिकॉर्ड ऐप बनाई जा रही है, जिसमें जमाबंदी और शजरा नसब भी देखा जा सकेगा।
हिमाचल सरकार के निर्देश पर ये दोनों ही ऐप नेशनल इन्फोर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) तैयार कर रहा है। सर्कल रेट ऐप लोगों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि यह बताएगी कि किस क्षेत्र में भूमि को बेचने या खरीदने के लिए सरकार ने क्या रेट तय किया है। अगली स्लाइड में जानिए और क्या खास होगा इस एप में।
रजिस्ट्रेशन फीस भी जान पाएंगे
भूमि विक्रेता और खरीदार दोनों ही इसकी गणना कर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस जान सकेंगे। वे जान सकेंगे कि उन्हें राज्य में किस भूमि, मकान या फ्लैट के लिए रजिस्ट्रेशन स्टांप ड्यूटी और फीस कितनी देनी होगी। दूसरी लैंड रिकॉर्ड ऐप में खसरा, खतौनी या खेवट का ब्योरा डालने के बाद जमाबंदी और शजरा नसब मोबाइल पर खुल जाएगी। इससे कोई भी यह मोबाइल दिखाकर बता सकेगा कि फलां खसरा, खतौनी या खेवट उसके नाम से है।
यह भी कि कृषक प्रमाणपत्र और जाति प्रमाणपत्र के लिए उसके शजरा नसब में किस तरह का ब्योरा है। इससे लोगों को बार-बार बेवसाइट खोलने जैसा झंझट नहीं होगा। जब भी कोई नया अपडेट आएगा तो यह अपडेशन भी स्वत: ही ऐप में नजर आएगा। इससे लोगों का समय बचेगा और चलते-फिरते कहीं भी कोई भी ब्योरा जान सकेंगे।
अब तक ये आठ ऐप
अब तक इस तरह के आठ एप है। ये ऐप ईपेंशन, प्रेस रिलीजेज, यू हिमाचल, ई गैजेट, ई सैलरी, ई एचआरएमएस, ई ट्रांसफर्स और एचपीआईपीएच नाम से शुरू की गई हैं। सरकार की पेंशन संबंधी सूचना अब ई पेंशन ऐप पर होगी। ये कर्मचारियों, पेंशनरों और आम लोगों के लिए खूब उपयोगी हैं।
एनआईसी के स्टेट इन्फोर्मेटिक्स ऑफिसर अजय सिंह चहल ने बताया कि सरकार के निर्देश पर सर्कल रेट और लैंड रिकॉर्ड ये दो ऐप्स बनाई जा रही हैं। अब लोग हाथ में उठाए एंड्रोइड मोबाइल से ही जानकारी ले सकेंगे। इससे प्रदेश के लोगों को काफी ज्यादा फायदा होगा।