पहली बार कला और विज्ञान विषयों के लिए अलग मूल्यांकन मॉडल संगीत, नृत्य, पेंटिंग और फाइन आर्ट्स विषयों में प्रदर्शन आधारित परीक्षा को प्रमुख स्थान दिया गया है। इन विषयों में प्रायोगिक प्रदर्शन, वाइवा और फाइल रिकॉर्ड का संयुक्त मूल्यांकन होगा। दूसरी ओर विज्ञान और अन्य प्रायोगिक विषयों में प्रयोगशाला कार्य, प्रैक्टिकल परीक्षा और रिकॉर्ड फाइल के आधार पर अंक दिए जाएंगे। नई अधिसूचना के अनुसार पाठ्यक्रम का आधा हिस्सा पूरा होने के बाद प्रत्येक विषय में कक्षा परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। इसके अंक सीधे आंतरिक मूल्यांकन में जुड़ेंगे। इससे अंतिम परीक्षा पर निर्भरता कम होगी और पूरे सेमेस्टर के प्रदर्शन को महत्व मिलेगा। विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब आंतरिक मूल्यांकन सभी पाठ्यक्रमों का अनिवार्य हिस्सा होगा। उपस्थिति, कक्षा परीक्षण, असाइनमेंट और प्रस्तुतियों के अंक अंतिम परिणाम में शामिल होंगे।