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राष्ट्रीय शिक्षा नीति: पहली बार हर विषय के लिए परीक्षा का अलग ढांचा तय, संशोधित दिशा-निर्देश जारी

Tue, 16 Jun 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने स्नातक शिक्षा में पहली बार विषयों और क्रेडिट संरचना के आधार पर अलग-अलग परीक्षा ढांचा लागू कर दिया है। 
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू होने के साथ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने स्नातक शिक्षा में पहली बार विषयों और क्रेडिट संरचना के आधार पर अलग-अलग परीक्षा ढांचा लागू कर दिया है। अब सभी विषयों की परीक्षा एक समान प्रारूप में नहीं होगी। किसी पाठ्यक्रम के क्रेडिट, प्रकृति और अध्ययन पद्धति के अनुसार प्रश्नपत्र, परीक्षा अवधि और मूल्यांकन प्रणाली अलग होगी। विवि की ओर से जारी संशोधित दिशा-निर्देशों में 2 क्रेडिट, 3 क्रेडिट और 4 क्रेडिट पाठ्यक्रमों के लिए अलग परीक्षा प्रारूप निर्धारित किया गया है। चार क्रेडिट वाले डिसिप्लिन स्पेसिफिक और मेजर विषयों की परीक्षा तीन घंटे की होगी, जबकि तीन क्रेडिट पाठ्यक्रमों के लिए दो घंटे और दो क्रेडिट पाठ्यक्रमों के लिए डेढ़ घंटे का समय निर्धारित किया गया है। नई व्यवस्था में केवल परीक्षा अवधि ही नहीं बदलेगी, बल्कि प्रश्नपत्र की संरचना भी अलग होगी। चार क्रेडिट पाठ्यक्रमों में पांच भागों वाला प्रश्नपत्र होगा, जबकि तीन क्रेडिट पाठ्यक्रमों में चार भाग और दो क्रेडिट पाठ्यक्रमों में तीन भाग होंगे। विश्वविद्यालय ने प्रत्येक स्तर पर प्रश्नों की संख्या, विकल्प और अंक वितरण भी निर्धारित कर दिया है। नियमों के अनुसार पाठ्यक्रम का 50 प्रतिशत भाग पूरा होने पर परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। यह बदलाव केवल परीक्षा प्रणाली में संशोधन नहीं बल्कि शिक्षण प्रक्रिया के पुनर्गठन का हिस्सा है। अब पाठ्यक्रम की प्रकृति के अनुसार मूल्यांकन होगा और सभी विषयों पर एक जैसी परीक्षा प्रणाली लागू नहीं रहेगी।
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परीक्षा से पहले अनिवार्य होगा मिड-सेमेस्टर परीक्षण

पहली बार कला और विज्ञान विषयों के लिए अलग मूल्यांकन मॉडल संगीत, नृत्य, पेंटिंग और फाइन आर्ट्स विषयों में प्रदर्शन आधारित परीक्षा को प्रमुख स्थान दिया गया है। इन विषयों में प्रायोगिक प्रदर्शन, वाइवा और फाइल रिकॉर्ड का संयुक्त मूल्यांकन होगा। दूसरी ओर विज्ञान और अन्य प्रायोगिक विषयों में प्रयोगशाला कार्य, प्रैक्टिकल परीक्षा और रिकॉर्ड फाइल के आधार पर अंक दिए जाएंगे। नई अधिसूचना के अनुसार पाठ्यक्रम का आधा हिस्सा पूरा होने के बाद प्रत्येक विषय में कक्षा परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। इसके अंक सीधे आंतरिक मूल्यांकन में जुड़ेंगे। इससे अंतिम परीक्षा पर निर्भरता कम होगी और पूरे सेमेस्टर के प्रदर्शन को महत्व मिलेगा। विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब आंतरिक मूल्यांकन सभी पाठ्यक्रमों का अनिवार्य हिस्सा होगा। उपस्थिति, कक्षा परीक्षण, असाइनमेंट और प्रस्तुतियों के अंक अंतिम परिणाम में शामिल होंगे।

 
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