पर्यटन स्थल नाको की प्राकृतिक झील भी जम गई है। झील जमने से क्षेत्र के लोगों को पालतू पशुओं के लिए पानी पिलाने की समस्या खड़ी हो गई है। झील जमने से स्थानीय लोग इस पर आइस स्केटिंग का लुत्फ उठा रहे हैं। बच्चों को फुटबाल खेलते देखा जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर में बीते दिनों हुई बर्फबारी के चलते पारा शून्य से नीचे चला गया है। जिले में शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है। जिले में तापमान माइनस आठ डिग्री से नीचे पहुंच रहा है। इससे जिले में कई जगह पेयजल लाइनें, झरने और झीलें जमना शुरू हो गई हैं। पर्यटन स्थल नाको की प्राकृतिक झील भी जम गई है। झील जमने से क्षेत्र के लोगों को पालतू पशुओं के लिए पानी पिलाने की समस्या खड़ी हो गई है। झील जमने से स्थानीय लोग इस पर आइस स्केटिंग का लुत्फ उठा रहे हैं। बच्चों को फुटबाल खेलते देखा जा सकता है।
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जनजातीय जिला किन्नौर में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। जिले में ग्लोबल वार्मिंग का असर भी देखने को मिला है। बीते 18 दिसंबर को अंतिम गांव छितकुल में तापमान माइनस 8 डिग्री सेल्सियस होने पर भी यहां हिमपात नहीं हुआ, जबकि अधिकतर इलाकों में पांच से दस सेंटीमीटर तक हिमपात हुआ था। छितकुल गांव से करीब 10 किलोमीटर नीचे और गर्म माने जाने वाले इलाकों में पांच सेंटीमीटर तक बर्फबारी हुई। हंगरंग वैली सहित जिले के पर्यटन स्थल सांगला, छितकुल, मुलिंग, कल्पा और नाको में न्यूनतम तापमान -7 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे है।