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Success story: नाहन की सृष्टि शर्मा ने यूजीसी नेट में हासिल किए 97 परसेंटाइल

Sat, 15 Apr 2023 09:36 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, सराहां (सिरमौर)

सार

नाहन विधानसभा क्षेत्र के चोरियां गांव की सृष्टि शर्मा ने जियोग्राफी में यूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा पास कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने 97 परसेंटाइल हासिल किए। इस उपलब्धि से परिजन फूले नहीं समा रहे हैं।
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सृष्टि शर्मा - फोटो : संवाद
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हिमाचल प्रदेश के नाहन विधानसभा क्षेत्र के चोरियां गांव की सृष्टि शर्मा ने जियोग्राफी में यूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा पास कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने 97 परसेंटाइल हासिल किए। इस उपलब्धि से परिजन फूले नहीं समा रहे हैं। सृष्टि की प्रारंभिक शिक्षा क्योंथल कॉन्वेंट पब्लिक स्कूल जुन्गा से हुई। इसके बाद दसवीं तक की शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल नाहन से हासिल की। उन्होंने नॉन मेडिकल में बारहवीं की परीक्षा एवीएन पब्लिक स्कूल नाहन से पास करने के बाद जियोग्राफी विषय में स्नातक और जियोग्राफी ऑनर्स में मास्टर डिग्री पंजाब विश्वविद्यालय की।

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सृष्टि ने कहा कि इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए वह दिन में छह घंटे तक पढ़ाई करती थीं। कोई भी मंजिल हासिल करने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति होनी चाहिए। अच्छी शिक्षा ग्रहण करने के लिए जहां सकारात्मक सोच होनी चाहिए, वहीं पौष्टिक भोजन भी जरूरी है। इस उपलब्धि के उन्होंने अपने गुरुओं, माता-पिता व भाई को श्रेय दिया है। सृष्टि शर्मा के पिता कमलेश शर्मा पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं और माता चंचल शर्मा गृहिणी हैं।

कुल्लू के युवा ने उत्तीर्ण की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा
वहीं, जिला कुल्लू की सैंज घाटी के युवा ने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने फरवरी-मार्च 2023 में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा करवाई थी। जिले के मोहन ठाकुर ने हिंदी विषय में चार मार्च को परीक्षा दी थी, जिसमें वह उत्तीर्ण हुए हैं। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक पाठशाला शलवाड़, 12वीं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सैंज, यूजी की पढ़ाई राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुल्लू से की है। वहीं, हिंदी विषय में वह एमए भी महाविद्यालय कुल्लू से ही कर रहे हैं। वह सैंज घाटी की पंचायत कनौन के गांव शौहल के एक सामान्य परिवार से संबंध रखते हैं। उनकी माता दुर्गा देवी गृहिणी हैं और पिता स्वर्गीय लछी राम किसान थे। मोहन ठाकुर ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता और शिक्षकों को दिया है।
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