नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट ने राज्य में सिंचाई, पेयजल और ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के निर्माण के लिए 102 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। नाबार्ड ने यह राशि ग्रामीण आधार संरचना विकास फंड (आरआईडीएफ-19) के तहत हिमाचल प्रदेश सरकार को मंजूर की है।
विभिन्न परियोजनाओं के लिए मंजूर राशि तीन साल के दौरान खर्च करनी होगी। प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक केपी चंद ने बताया कि 51.04 करोड़ की सिंचाई परियोजनाओं के तहत 11 ट्यूबवेल, लिफ्ट और कूहल सिंचाई योजनाएं कांगड़ा, मंडी, ऊना और सोलन जिलों में क्रियान्वित की जाएंगी।
इससे 3113 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र सुनिश्चित सिंचाई के तहत आने की उम्मीद है। इसके अलावा, सिरमौर, मंडी, कुल्लू, सोलन और कांगड़ा जिले की लगभग 1.23 लाख ग्रामीण आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 26.45 करोड़ की ऋण सहायता से 9 पेयजल परियोजनाएं क्रियान्वित की जाएगी।
साथ ही कांगड़ा, हमीरपुर, सोलन, शिमला और मंडी जिलों में 50.69 किमी लंबाई की 6 ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के लिए रुपये 24.28 करोड़ की ऋण सहायता दी गई है। जिनसे 66 गांव और 16,000 लोग बारहमासी और 25 विपणन केंद्रों से जुड़ जाएंगे।
इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों जैसे सिंचाई, पेयजल, ग्रामीण सड़क, बाढ़ सुरक्षा आदि के तहत परियोजनाओं के क्रियान्वयन करने के लिए राज्य सरकार को 2014-15 के दौरान आरआईडीएफ के तहत 559 करोड़ की ऋण सहायता मंजूर की गई है।
इनके लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध
नाबार्ड गोदामों, सिलोज, कोल्ड स्टोरेज, सीए स्टोर और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए कारपोरेट क्षेत्र सहित पात्र संस्थाओं के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करवा रहा है। सहायक महाप्रबंधक ठाकुर सिंह नेगी ने कहा पर्याप्त कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की तत्काल आवश्यकता है।
उन्होंने निजी कंपनियों, उद्यमियों और सहकारी समितियों से आग्रह किया कि राज्य में स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में मदद करने के लिए इस योजना में भाग लें।