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हिमाचल: मुकेश बोले- जल शक्ति विभाग को को सबसे अधिक एक हजार करोड़ नुकसान, पंचवक्त्र मंदिर का रखरखाव होगा

Thu, 13 Jul 2023 11:37 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी

सार

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मंडी में पत्रकार वार्ता में कहा कि जल प्रलय में सबसे बड़ी चुनौती जल महकमे के सामने आई है और एक हजार करोड़ की चपत लगी है। 
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उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पंचवक्त्र मंदिर व अन्य क्षेत्रों में नुकसान का जायजा लिया। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान जल शक्ति विभाग को हुआ है। जल प्रलय में सबसे बड़ी चुनौती जल महकमे के सामने आई है और एक हजार करोड़ की चपत लगी है। विभाग की 10 हजार में से करीब 50 फीसदी योजनाएं बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। बाढ़ आने से पंप हाउस, मशीनरी, लाइनें, सोर्स ध्वस्त हो गए हैं। पंप हाउस में गाद भरने से संचालन ठप हुआ है। ऐसे विकट हालात में पानी की सप्लाई बहाल करना एक कठिन चुनौती है। यह बात उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मंडी में पत्रकार वार्ता में कही। उन्हाेंने कहा कि विभाग के अधिकारी मुख्य अभियंता से लेकर फील्ड स्टाफ तक दिन-रात पानी बहाली के लिए दिन रात एक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विभाग के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। मंडी में पड्डल में स्थित पेयजल योजना का निरीक्षण किया तो पूरी योजना ध्वस्त हो गई है। रेत और गाद में ही पंप और मशीनें कैद दो गई हैं।

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पंचवक्त्र मंदिर के रखरखाव के लिए बुलाए जाएंगे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी : मुकेश
 पंचवक्त्र मंदिर देवभूमि की आस्था का प्रतीक है और इस मंदिर का इतनी बाढ़ में भी कुछ नहीं बिगड़ना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के लोगाें की आस्था कितनी प्रगाढ़ है।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी भी इसके रख रखाव के लिए बुलाए जांएगे। यह बात उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कही। उप मुख्यमंत्री ने पंचवक्त्र महादेव मंदिर में रिस्टोरेशन कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि भीषण बाढ़ के बावजूद मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है तथा इसमें स्थापित भगवान महादेव समेत सभी विग्रह यथास्थान स्थापित एवं सुरक्षित हैं। उन्होंने मंदिर के गर्भ गृह से गाद निकालने के साथ महादेव समेत अन्य विग्रहों को साफ करने का कार्य कर लिया गया है। मंदिर परिसर में अभी सिल्ट निकालने का काम जारी है। उन्होंने मंदिर में माथा टेका तथा बाढ़ पीड़ितों के कुशलक्षेम के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर उन्हाेंने कहा कि मंदिराें को अधीन लेना ही बड़ी बात नहीं है उनका रख रखाव करना चुनौती पूर्ण है।

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