जाने के झंझट से मिलेगी राहत, थ्री
टेस्ला
एमआरआई मशीन पर खर्च होंगे 24
करोड़
रुपये
मशीन खरीद का अस्पताल प्रबंधन दे चुका है ऑर्डर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में जल्द एमआरआई मशीन स्थापित होगी। इसके बाद मरीजों को चमियाना से आईजीएमसी जाने के झंझट से भी राहत मिलेगी।
एमआरआई (मैगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग) स्कैन की सुविधा मरीजों को चमियाना में ही शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए करोड़ों की लागत से मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अस्पताल में इस मशीन को स्थापित करने का कार्य शुरू हो चुका है। यह थ्री टेसला मशीन होगी, इस पर करीब 24 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अभी चमियाना में दाखिल मरीजों को एमआरआई करवाने के लिए आईजीएमसी जाना पड़ता है। आईजीएमसी में हर रोज एमआरआई के लिए लंबी लाइनें लगी रहती हैं। ऐसे में चमियाना में मशीन लगने के बाद आईजीएमसी में मरीजों की लगने वाली लाइनें भी घटेंगी। चमियाना अस्पताल से औसतन रोजाना ओपीडी और अलग-अलग विभागों में करीब 15 मरीजों के एमआरआई टेस्ट लिखे जाते हैं।
चमियाना अस्पताल से वर्तमान में मरीजों को एमआरआई करवाने के लिए तीन से चार माह बाद की डेट मिलती है। एक दिन में आईजीएमसी में करीब 25 टेस्ट हो पाते हैं, जिसकी रिपोर्ट तीसरे दिन आती है। न्यूरोलॉजी और यूरोलॉजी सहित यहां के सभी विभागों के मरीजों की बीमारी का पता लगाने के लिए एमआरआई टेस्ट लिखे जाते हैं। इसलिए अस्पताल प्रबंधन का पूरा प्रयास है कि जल्द अस्पताल में एमआरआई मशीन लगे। मशीन खरीद का ऑर्डर दे दिया है। इस टेस्ट को संस्थान में शुरू करने के लिए आवश्यक अनुमति लेने और मशीन को रेडियोलॉजी विभाग में स्थापित करने का काम शुरू हो चुका है।
जल्द मिलेगी सुविधा
चमियाना अस्पताल के प्राचार्य डाॅ. ब्रृज शर्मा और एमएस डाॅ. सुधीर शर्मा ने कहा कि छह माह के भीतर चमियाना अस्पताल में एमआरआई मशीन लग जाएगी। इसके साथ ही यहां मरीजों को टेस्ट की सुविधा मिलना शुरू होगी। सुपर स्पेशलिटी के अधिकतर विभागों में एमआरआई टेस्ट लिखे जाते हैं। इसके लिए मरीजों को आईजीएमसी जाना पड़ता है। मरीज का एमआरआई (मैगनेटिक रिसोनेंस इमेजिंग) करने में मैगनेटिक, रेडियो वेव और कंप्यूटर का उपयोग कर मानव शरीर के अलग-अलग ऑर्गन, टिशु, ब्लड वेसल्स की पिक्चर ली जाती है। इससे ब्रेन ट्यूमर, जोड़ों के दर्द, ब्लड वेसल्स की ब्लॉकेज का पता लगाया जाता है।