हिमाचल सरकार ने एनजीटी के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा है, जिसका खामियाजा मनाली व रोहतांग की जनता को झेलना पड़ रहा है।
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भाजपा सांसद राम स्वरूप ने मंगलवार को शून्य प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा में कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि रोहतांग ग्लेशियर नहीं, स्नो लाइन है। यह ईको सेंसटिव जोन नहीं है। गुलाबा के ऊपर इकोलॉजी नहीं रही है।
रोहतांग के नजदीक अगर कोई ग्लेशियर है तो उस ग्लेशियर को हामता कहा गया है। इस बात को एनजीटी ने भी स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने एनजीटी के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा है, जिसका खामियाजा मनाली व रोहतांग की जनता को झेलना पड़ रहा है।
उन्होंने भारत सरकार से इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाने की मांग की ताकि रोहतांग में पर्यटकों और स्थानीय व्यवसायियों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने बहुत विलंब के उपरांत एनजीटी में जनता का अधूरा पक्ष रखा, जिसका असर कारोबारियों और पर्यटकों पर पड़ा है।