दिन सोमवार, समय सुबह के सात बजे। हिमाचल के कुल्लू में प्राइड ऑफ कुल्लू के लिए होने वाली नाटी में हिस्सा लेने महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर रथ मैदान में पहुंचना शुरू हुईं। हर कोई इस ऐतिहासिक लम्हे का गवाह बनने के लिए उत्साहित दिखा। जैसे-जैसे वक्त गुजरने लगा, मैदान में भीड़ बढ़ने लगी। दोपहर 12 बजे रंग-बिरंगे परिधानों के साथ सजी 12 हजार महिलाओं से मैदान खचाखच भर गया।
इनमें 15 से 70 साल आयुवर्ग की महिलाएं एवं युवतियां शमिल थी। दोपहर 12:43 बजे परिवहन मंत्री जीएस बाली ने नाटी शुरू करने की विधिवत घोषणा की। नाटी शुरू करने से पहले गुब्बारे आकाश में छोड़े गए। लालड़ी नृत्य के दो गानों पर 12 मिनट तक नृत्य किया गया। इसके बाद दूसरे ताल पर 8 मिनट, तीसरे ताल पर 22 मिनट और चौथे ताल पर 5 मिनट और पांचवें ताल पर दो मिनट तक नृत्य किया। बेटी है अनमोल का संदेश दे रही ये महिलाएं काफी खुश नजर आ रही थी।
छह ताल बजाए कुल्लू के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर कुल छह ताल बजाए गए। नाटी की शुरुआत धीमे ताल से हुई। इसके बाद जैसे-जैसे सामूहिक नाटी में समय बढ़ता गया वैसे-वैसे ताल भी बदलते रहे। वहीं लोकगीतों को गाने के लिए जिला और हिमाचल में ख्याति प्राप्त कर चुके एक दर्जन गायकों की टोली ने हजारों महिलाओं को नचाया। इसके साथ ही इस नाटी को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज कराने की दावेदारी पेश कर दी गई है।
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