उद्घाटन के पांच महीने बाद ध्वस्त होने वाले मूलिंग पुल की जांच में नया खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि लोनिवि के मेकेनिकल विंग को देश के सबसे बड़े सरकारी उपक्रम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में मूलिंग ब्रिज के लिए स्टील उपलब्ध नहीं हो सकी थी। लिहाजा, परचेजिंग कमेटी ने किसी निजी कंपनी से स्टील खरीदी थी। हालांकि, विभाग का यह तर्क किसी के गले नहीं उतर रहा है।
उधर, जांच के लिए उपकरण उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ ने पुल में इस्तेमाल लोहे के सैंपल जांचने से इनकार कर दिया है। ऐसे में जांच टीम ने चंडीगढ़ की ही किसी निजी लैब में सैंपल भेजा है। मुख्यमंत्री के मूलिंग ब्रिज के दौरे की खबरों से विभाग में हड़कंप मचा है।
विभाग ने आनन-फानन में क्षतिग्रस्त पुल के हिस्सों को मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले हटाने के निर्देश दिए हैं। जांच टीम के प्रमुख मंडी जोन के मुख्य अभियंता एसके कोहली ने बताया कि सेल में ब्रिज के लिए स्टील उपलब्ध न होने से परचेजिंग कमेटी ने कुछ लोहा निजी कंपनी से खरीदा है, जिसकी जांच हो रही है।
कोहली ने दावा किया है कि एक माह के भीतर सैंपल रिपोर्ट आने के बाद दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई शुरू होगी। मूलिंग पुल ने लोनिवि के पूरे कुनबे की साख को दाव पर लगा दिया है। बताया जा रहा है कि पुल में इस्तेमाल लोहे की कीमत करीब पौने दो करोड़ रुपये है।
निजी कंपनी से खरीदी गई स्टील की गुणवत्ता की जांच के बाद कुछ और खुलासा हो सकता है। कोहली ने कहा कि मेकेनिकल विंग ने पुल में इस्तेमाल स्टील की खरीदारी जिस निजी कंपनी से की है उसकी जांच की जा रही है। इसे कहां से खरीदा है, इसकी भी छानबीन की जा रही है।